अभी पिछले महीने ही चार राज्यों के विधान सभा चुनाव बीता भी नहीं कि इनमें से दो राज्यों की दो मज़बूत क्षेत्रीय पार्टियां विघटन की ओर बढ चली हैं और यह भी करीब-करीब तयं है कि ये दोनों पार्टियां इतिहास के गर्त में चली जायेंगी। पहले हम दक्षिण भारत के प्रांत तमिलनाडु की बात करें , अन्नाद्रमुक कड़गम पार्टी के संस्थापक तमिलनाडु के ही फिल्म की दुनियां के स्टार एम. जी. रामचंद्रन थे उन्होने कई वर्षों तक अपने ग्लैमर की बदौलत तमिलनाडु की राजनीति के शिखर पर रहे उनके घुर विरोधी करूंणानिधी ने भी फिल्मों से राजनीति का रूख किया और द्रविड मुनेत्र कड़गम (DMK)नामक पार्टी बनाई और उन्हे भी राजनीति में बड़ी सफलता मिली। इन्ही दोनों पार्टियों ने बारी-बारी से तमिलनाडु की सत्ता पर वर्षों राज किया एम.जी. रामचंद्रन जिन्हे लोग प्यार से एम.जी.आर. कहते थे ,उनकी मौत के बाद उनकी प्रेमिका रहीं फिल्म अभिनेत्री कुमारी जयललिता का पार्टी पर कब्जा हो गया और उन्होने राज्य की बागडोर सम्भाली। उनकी अदावत करुणानिधि और उनकी पार्टी से चलती रही जयललिता की मौत के बाद उनका और दल का कोई वारिस अथवा पार्टी को नेतृत्व देने वाला सक्षम नेता नहीं मिला। इधर करुणानिधि की भी मौत हो गई और उनके एकमात्र सुयोग्य पुत्र स्टालिन ने अपने कौशल से डी.एम.के. को सत्ता के शीर्ष पर अन्नाद्रमुक कड़गम को चुनाव में हराकर पहुंचा दिया, उनकी सहयोगी पार्टी कांग्रेस बनी इधर अन्नाद्रमुक कड़गम की सहयोगी पार्टी भाजपा बनी। कांग्रेस और भाजपा का वहां तमिल नाडु में कोई बड़ा जनाधार नहीं है,लेकिन तमिल नाडु की इन दोनों क्षेत्रीय पार्टियों को केंद्र सरकार की मदद की जरूरत रहती है, अबतक तमिल नाडु में यही दो पार्टियां हुआ करती थीं। इस बार 2026 के विधान सभा चुनाव में एकनये फिल्म स्टार जोजफ विजय ने टी.वी.के.नामक पार्टी बनाकर चुनाव लड़ा और 107 सीट जीत कर सबसे बड़ी पार्टी बनी विजय पहले से राहुल गांधी और उनकी आयडोलाजी से प्रभावित थे, चुनाव पूर्व ही वह कांग्रेस से गठबंधन करना चाहते थे लेकिन राहुल गांधी स्टालिन के साथ काफी सालों से गठबंधन में थे,इसलिए विजय की पार्टी से गठबंधन नहीं हो सका, विजय को कांग्रेस ने अपने पांच विधायकों के साथ विजय के समर्थन में आ गये बाकी जोड़-तोड़कर सरकार विजय के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत से बन गई, लेकर यहां अन्नाद्रमुक कड़गम के 23 और विधायकों ने पार्टी से बगावत कर विजय की पार्टी को समर्थन कर दिया । दरअसल इन अन्नाद्रमुक कड़गम के नेताओं को अपनी पार्टी का भविष्य नहीं दिख रहा था,कारण जयललिता आखिरी जनाधार वाली नेता थीं, वर्तमान अध्यक्ष पलानी स्वामी जनाधार विहीन नेता हैं,कोर्ट के आदेश पर अध्यक्ष बने हुए हैं इस कारण अन्नाद्रमुक कड़गम के नेताओं को साफ लगा कि पार्टी का जहाज डूबने से पहले विजय की जीती पार्टी को समर्थन देकर वहीं अपना ठिकाना लेलें,बाद में चार अन्य विधायक भी टीवीके के समर्थन में आ गए। बाकी बचे विधायक भी कहीं न कहीं अपना शरण ले ही लेंगे अब बात पश्चिम बंगाल राज्य की अबतक राज्य मे 15 साल से राज कर रही ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस की करें वहां अराजकता,भय, विरोधी दलों के दमन से चल रही सरकार 2026 का चुनाव हार गई और सत्ता की बागडोर भाजपा के पास आ गई। जैसा अबतक तृणमूल कांग्रेस ने वामदल और कांग्रेस के साथ अराजक और दुश्मनी भरा व्यवहार कर दमन और दण्डात्मक और डराने,धमकाने वाला कार्य वामदल और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ किया था वही सब अब तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के साथ हो रहा है,पार्टी के हजारों कार्यकर्ता और नेता पार्टी छोड़कर भाजपा में जा रहे हैं, चूंकि ममताबनर्जी की उम्र भी 70 के उपर या आसपास हो गई है और अब उनकी पार्टी का पुनरुत्थान होना लगभग न के बराबर रह गया है और ममता जैसा जनाधार और करिश्माई नेता भी पार्टी के पास नहीं है और कांग्रेस पार्टी ने भी पश्चिम बंगाल में एक बार फिर अपने को जमाने की कोशिश में लग गई है आज ही ममता ने तृणमूल कांग्रेस के विधायकों और सांसदों की बैठक बुलाई थी,आधे से भी कम विधायक और सांसद पहुंचे, जिस कारण बैठक कैंसिल कर दी गई, ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी पर गुस्साई पब्लिक ने हमला कर दौडा-दौडा कर पीटा। पार्टी एक माह से भी कम समय में विघटित हो गई और वह दिन दूर नहीं,जब तृणमूल कांग्रेस इतिहास में दफन हो जाए। -सम्पादकीय-News51.in
