माननीय उच्चतम न्यायालय ने वृद्ध, गम्भीर रूप से बीमार और ऐसे कैदियों की, जिनकी जमानत वर्षों पूर्व होने के बावजूद पैसे के अभाव में जेल से बाहर न आ पाने वाले कैदियों की रिहाई के लिए सभी राज्य और केन्द्र शासित प्रदेशों को यह निर्देश दिया है कि इसके लिए तीन माह के अंदर नीति बनाकर पेश करे, ताकि ऐसे कैदियों की शीघ्र रिहाई हो सके। जेलों में जगह की कमी और कैदियों की बढती संख्या को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह नीति बनाने के निर्देश दियै हैं।सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने गुरुवार को कहा कि नीति में रिहाई के लिए पात्रता मापदंड और प्रक्रियात्मक ढांचे को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाना चाहिए। पीठ ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा दायर एक याचिका पर अपना यह निर्णय सुनाया।-सम्पादकीय-News51.in
सुप्रीम कोर्ट ने वृद्ध ,गम्भीर रूप से बीमार और जमानत पाये ऐसे बंदी, जिनकी पैसों के अभाव में वर्षों से रिहाई लम्बित है, उनकी शीघ्र रिहाई हेतु सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशोंको शीघ्र रिहाई हेतु तीन माह के अंदर नीति बनाकर तैयार करने के निर्देश दिए
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