2011 के विधान सभा के चुनाव में पश्चिम बंगाल में वामदलों के लगभग 35 साल के कार्यकाल के बाद ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने वामदलों को न केवल हराया बल्कि वहां की सभी संस्थानों पर वामदल के कार्यकर्ताओं का न सिर्फ डराया ,धमकाया बल्कि पुलिस बल का भी वामदल के कार्यकर्ताओं को तोडने में प्रयोग किया और तो और अपनी पार्टी के गुण्डों और अराजक तत्वों को वामदल और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित करवाया और जेल भेजवाया। अब वही सब उनकी पार्टी और कार्यकर्ताओं के साथ हो रहा है तो उन्हे बड़ा कष्ट हो रहा है, उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी को न केवल पीटा गया, बल्कि कालिख भी पोती गई। यह तो राहुल गांधी की शराफत कहिए कि उन्होने न केवल फोन पर बात की बल्कि अन्य मदद का भी आश्वासन दिया, जबकि पश्चिम बंगाल के कांग्रेस कार्यकर्ता राहुल गांधी की इस बात से सहमत नहीं होंगे।ममता ने अपने मुख्य मंत्रित्व काल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर भारी जुल्म ढाया था, कांग्रेस को किसी भी सूरत में पनपने का मौका भी नहीं दिया था अब उपचुनाव के लिए ममता बनर्जी को उम्मीद वार नहीं मिल रहे हैं, ममता की पार्टी में भगदड मची हुई है, लोग पार्टी छोड़-छोड़कर भाग रहे हैं और भाजपा में शामिल हो रहे हैं2021 में ही ममता की नन्दीग्राम में सुवेंन्दु अधिकारी से हार से यह साबित हो गया था कि ममता पहले से कमजोर हुई हैं,अब भवानी पुर में भी ममता की हार ने सुवेंन्दु अधिकारी को मुख्य मंत्री की कुर्सी दिलाई। अब बिना सत्ता और बिना रसूख के ऐसी पार्टियों के कार्यकर्ताओं का हाल होता है 2011 में क्लब, पंचायतों और नगर पालिकाओं पर जबरन कब्जा करने वाली तृणमूल कांग्रेस अब 70 पार पहुंची ममता के लिए रिवाइवल कर पाना बेहद असम्भव है और इस बात को पार्टी के नेता और कार्यककर्ता भली-भांति लमझ रहा है, कार्यकर्ता तो बड़ी तेजी से भाजपा की ओर रूख कर रहे हैं और बताया जा रहा है कि20-25 बड़े नेता जल्द ही भाजपा में शामिल होने वाले हैं बिना आडियोलाजी के सत्ता और भय के डर की दीवार गिरते ही सभी ममता का साथ छोड़ने लगे हैं, नन्दी ग्राम उपचुनाव के लिए प्रत्याशी नहीं मिल रहे हैं, भगदड की स्थिति बनी हुई है-सम्पादकीय-News51.in
