पंजाब निकाय चुनाव में काफी कुछ हुआ है,वहां कांग्रेस प्रत्याशियों के कई स्थानों पर न केवल नामांकन रद्द कराए गए बल्कि कई को डरा-धमका कर बैठाया गया। और यह कोई नई बात नही है, जहां जिसकी सरकार रहती है,वह ऐसा ही करती है,भाजपा के प्रत्याशियों के साथ इस तरह की कोई घटना नहीं हुई क्योंकि केंद्र में उसकी सरकार है। मैने एक कांग्रेस की घटनाओं पर गहरी नजर रखने वाले पत्रकार प्रदीप चावला जी का एक लेख पढ रहा था,उसमें लिखी पंजाब विधान सभा से सम्बंधित बातों पर यदि पहले कांग्रेस आलाकमान द्वारा सही निर्णय लिए जायं तो पंजाब में कांग्रेस को अपेक्षित सफलता मिल सकती है, उनके अनुसार, राजा वेडिंग की पंजाब कांग्रेस नेताओं की अंर्कलह पर काबू नहीं कर पा रहे हैं,अब पंजाब विधान सभा चुनाव में मात्र लगभग छह माह का समय बचा है74 वर्षीय राणा गुरूजीत सिंह जिन्होने आजतक 2009 का लोकसभा को छोड़कर कभी चुनाव नहीं हारा है, यहांतक कि जब आम आदमी पार्टी ने विधान सभा की 92 सीटें हासिल की थी तब भी राणा गुरूजीत सिंह न केवल अपनी सीट जीती बल्कि अपने लडके को भी जितवाया।इस निकाय चुनाव में भी अपने विधान सभा की 50 में31 सीटें जीती और अपने बेटे के क्षेत्र की भी तमाम सीट जीतीं है अपने बेटे को सुल्तानपुर लोधी से पिछली बार टिकट चाहते थे,लेकिन तब नवजोत सिंह सिद्धू ने उउनका टिकट कटवा दिया था । पंजाब में शुगर किंग माने जाते हैं, काफी सम्पन्न हैं , केंद्र सरकार ने उनपर सीबीआई और E.D.के छापे भी पिछले साल पडवाये थे, और अपने पाले में लाने का भी प्रयास किया था, लेकिन वह कांग्रेस में ही बने रहे। मैने प्रदीप चावला जी का यह लेख पढा तो मुझे राणा गुरूजीत सिंह काफी प्रभावी लगे और वे सबको लेकर चलने में भी सक्षम हैं तथा दबंग भी हैं और चुनाव भी जितवाने के सारे दांव-पेंच भी उन्हे आते हैं , दूसरे दो लोगों की कैम्पेन कमेटी बनाई जा सकती है,काफी लोगों का ये मानना है कि चरणजीत सिंह चेन्नी को मुख्य मंत्री बनाए जाने के बाद पर्याप्त अवसर नहीं मिला काम करने का। सबसे बड़ी बात वह अनुसूचित जाति से आते हैं और पंजाब में पूरे भारत में सबसे बड़ी आबादी लगभग 31% अनुसूचित यहीं हैं चरणजीत चन्नी यहां अनुसूचित जाति के बेहद लोकप्रिय नेता हैं दूसरा नाम विजेंद्र सींगला का है,सुनील जावड़ बड़े हिंदू नेता थे उनके जाने के बाद कांग्रेस में कोई बड़ा हिंदू चेहरा नहीं है,पंजाब में हिंदुओं की 14-15 % आबादी है, कमाल की बात ये है कि सभी दल ने जट्ट सिखों की आबादी लगभग 22% है को अपना अध्यक्ष बनाया है और तो और भाजपा ने जट्ट सिख केवल सिंह ढिल्लों को हिंदू चेहरा रहे अध्यक्ष सुनील कुमार जावड़ को हटाकर बना दिया है अबकी बार पंजाब विधान सभा चुनाव त्रिकोणीय होना है, एक तरफ आम आदमी पार्टी तो दूसरी तरफ अकाली दल और भाजपा गठबंधन तथा तीसरी पार्टी कांग्रेस है प्रदीप चावला ने पंजाब में रहकर काफी लोगों से बात कर यह आकलन किया है, चूंकि कांग्रेस के लिए यह चुनाव काफी अहम और पंजाब के लोगों के अनूकुल है,माहौल कांग्रेस के पक्ष में है बशर्ते कांग्रेस काफी सोच-विचार कर निर्णय ले और संगठन में बदलाव करे तो अपेक्षित परिणाम प्राप्त होंगे-सम्पादकीय-News51.in
