आज शाम बंगाल विधान सभा चुनाव के दूसरे फेज के मतदान के तत्काल बाद सभी चैनलों ने 20-25 सर्वे को दिखाना शुरू कर दिया, सभी के ऐक्जिट पोल सरकार के पक्ष में अपने ऐक्जिट पोल में पांचो राज्य में ऐन-केन बीजेपी की बढ़त दिखाई जा रही है। ,केवल केरल में UDF(कांग्रेस गठबंधन) और LDF यानि वाम गठबंधन के बीच कडा मुकाबला में कांग्रेस गठबंधन को थोड़ा ऐज दिखाया गया है वहीं बंगाल में भाजपा की सरकार बनती दिखाई जा रही है अब यहां मैं राजीव रंजन (पत्रकार) की एक बात बताना चाह रहा हूं,जिससे बंगाल और असम का चुनाव साफ दिख जायेगा कि कौन सी पार्टी इन दोनों राज्यों में चुनाव जीत रही है अगर मध्यप्रदेश सरकार डेढ हजार रूपया महिलाओं के खाते में डाल कर चुनाव जीत सकती है अगर असम के मुख्य मंत्री चुनाव की घोषणा के ठीक पहले अगर 40 लाख महिलाओं के खाते में नौ हजार रूपया न डाले होते तो शायद इस बार वहां कांग्रेस की जीत सुनिश्चित थी यहां महिलाओं ने एकतरह चुनाव भाजपा की हारी बाजी को जीत मैं बदल दिया है एक तरफ विपक्ष का वादा करना कि मेरी सरकार आयेगी तो मैं आपके ये कर दूंगा,आपको यह दूंगा । एक तरफ सरकार दे रही है और दूसरी तरफ विपक्ष का वाद तेरा वादा ही बना रह जाता हैयही हाल बंगाल का है अगर झारखंड, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में अगर महिलाओं के खाते में दिया गया डेढ हजार रूपया देना काम कर सकता है तो ऐसा कौन सा पैमाना है कि बंगाल में यह फैक्टर काम नहीं करेगा।रूपोश्री,कन्या श्री योजना के अंतर्गत डेढ हजार रूपया किस घर कीमहिलाओं के घर में नहीं जाते।लगभग सवा दो ,इसके अलावा जिस घर का कक्षा 10 पास बेरोजगार बच्चा जिसकी उम्र 21 वर्ष हो गई है, उसके खाते में युवा श्री योजना के अंतर्गत डेढ हजार रूपया हर महीने दिये जाते हैं । इसतरह बिना लाजिक पार्टीयों को जीताने-हराने का शगल अब पुराना होता जा रहा है।अब मेरी भी एक बात सुन लिजिए, अगर चुनाव के पहले 40 लाख महिलाओं के खाते में हेमंता विश्व शर्मा ने न डाले होते तो वह चुनाव नहीं जीत पाते,अब भाजपा की सरकार को असम में कोई नहीं हरा पायेगा। इसीप्रकार बंगाल विधान सभा चुनाव में इस बार भी ममता बनर्जी को कोई नहीं हरा पायेगा।पांच दिन खुश होने के लिए ये ऐक्जिट पोल ठीक है। जहांतक केरल का सवाल है वहां कांग्रेस की सरकार बन रही है अब बात तमिलनाडु की कर लेते हैंऔर यह भी सच है कि स्टालिन के डी एम. के. के प्रति लोगों में नाराजगी थी,लेकिन प्रधानमंत्री श्री मोदी ने महिला आरक्षण के साथ डिमिलिटेशन भी लोकसभा में लाये, बस यहीं स्टालिन को मौका मिल गया और वो तमिलनाडु की जनता को यह समझाने में सफल हो गए कि भाजपा तमिल नाडु की शक्ति(सीटों की संख्या के हिसाब से) कम करना चाहती है फिर तो ब्लैक डे भी काली पट्टी बांध कर पूरे तमिलनाडु में मनाया गया।और पांसा पलट गया । इस तरह मेरे अनुमान के हिसाब से असम में भाजपा,केरल में कांग्रेस, बंगाल में एकबार फिर तृणमूल कांग्रेस ,तमिलनाडु में एक बार फिर स्टालिन की डी.एम. के. की सरकार ही आयेगी।कौन कितना सीट पाकर जीतेगा या हारेगा,इस पचड़े में नहीं जाना चाहता,पांडिचेरी छोटा राज्य है,वहां की सही जानकारी नहीं है-सम्पादकीय-News51.in
