पिछले एक-डेढ साल में अनायास ही कुछ ऐसा होता जा रहा है कि इंडिया गठबंधन जो दिखाने के लिए थी,अब अपने सही स्वरूप में आकार ले रही है,अभीतक सब कुछ दिखावट थी,लेकिन अंदर खाने इंडिया गठबंधन आपस में ही इस होड में लगे थे कि साथ वाला ज्यादा सीटें न जीतने पाय। अब हम एक-एक इंडिया गठबंधन की बात तो करेंगे ही और चुनाव दर चुनाव किस तरह से अपने ही गठबंधन सहयोगी को चुनाव में हरवाने का हरसंभव प्रयास करते हैं दूर नहीं इसकी शुरुआत बिहार विधान सभा चुनाव से करते हैं,इंडिया गठबंधन बहुत तेजी से अपने प्रचार-प्रसार में लगा था,तभी सीट बंटवारे पर आपस में गलाकाट युद्ध शुरू हो गया,तेजस्वी यादव ने कांग्रेस को बांटी सीटों पर अपने अन्य सहयोगीयों को चढा कर उनके प्रत्याशी उतरवा कर फरैंडली फाइट का नाम दिया इसतरह 15-17 सीट गंवा दिए गए और कई सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशियों को गठबंधन के सहयोगियों ने हरवा दिया इसतरह “इंडिया गठबंधन” की बुरी हार हुई, यह अलग बात है कि चुनाव घोषणा के पूर्व मुख्य मंत्री नितिश कुमार ने महिलाओं के खाते मेंदस-दस हजार रूपए बिजनेस के लिए दिया अब हरियाणा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने गठबंधन न हो पाने से नाराज होकर लगभग सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी कांग्रेस को हरवाने का हरसंभव प्रयास किया। फिर दिल्ली विधान सभा चुनाव में कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी को हरवाने के लिए सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार दिए। फिर बंगाल विधान सभा चुनाव में कांग्रेस ने ममता बनर्जी से खार खाकर सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार दिए, नतीजतन ममता बनर्जी बंगाल विधान सभा चुनाव हार गई, दिल्ली विधान सभा चुनाव में अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और ममता बनर्जी ने आम आदमी पार्टी के समर्थन में खूब प्रचार किया लेकिन आम आदमी पार्टी चुनाव हार गई, बंगाल विधान सभा चुनाव में अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और अरविंद केजरीवाल ने ममता बनर्जी के पक्ष में जी-जान से प्रचार किया,लेकिन ममता बनर्जी चुनाव हार गई, कारण जो भी रहा हो,तमिलनाडु में कांग्रेस और डी.एम.के के गठबंधन हारने पर कांग्रेस ने विजय थलापति के साथ हो गई और अब अरविंद केजरीवाल यह कहते फिर रहे हैं कि मेरे उपर तमाम आरोप लगाकर जेल भेज दिया,लेकिन राहुल गांधी और सोनियां गांधी को किसी मुकदमें में जेल नहीं भेजा गया कांग्रेस और भाजपा मिली-जुली कुश्ती लड़ रहे हैंऔर आपस में मिले हुए हैं,अब हालात ये है कि किसी को केजरीवाल की बात पर विश्वास नहीं रहा है,ममता बनर्जी भी बंगाल हार कर काफी कमजोर हो चुकी हैं और बंगाल के बाहर नतो उनका वजूद है,न बंगाल के बाहर कोई हैसियत, तेजस्वी यादव के बारे में भी यही बात कही जा सकती है अब जरा भाजपा के सहयोगियों की बात कर लें, नीतीश कुमार के राज्य सभा में आने के बाद नीतीश कुमार और उनकी पार्टी अब बिहार में मृत प्रायः है,उनके पुत्र में उनके जैसी काबलियत नहीं दिखती,आंध्र प्रदेश में जगन मोहन रेड्डी और उनकी पार्टी की स्थित बहुत अच्छी नहीं है,इसी प्रकार उड़ीसा में नवीन पटनायक और उनकी पार्टी की स्थित डांवाडोल है और इस उम्र के पड़ाव पर दुबारा पार्टी को खड़ा कर पाना नवीन पटनायक के लिए सम्भव नहीं है, यही हाल कर्नाटक में जे.डी.ऐस. और उसके मुखिया बोम्मई और उनके बेटे का है, तेलंगाना में के. चंद्र शेखर राव का भी हैलगता नहीं कि आगामी पांच साल तक उनकी पार्टी अब वापस तेलंगाना राज्य में वापसी कर पायेगी। इसी प्रकार महाराष्ट्र की राजनीति में हाशिए पर पहुंची शरद पवार और उनकी पार्टी,उद्धव और राज ठाकरे या उनकी पार्टी का वापस मजबूती से महाराष्ट्र की राजनीति में वापस लौट पाना मुश्किल होगा और तो और शरद पवार की पार्टी सम्भवतः भतीजे की मौत के बाद या तो कांग्रेस या भाजपा में मर्ज कर जाय। अब महाराष्ट्र में मात्र शिंदे की शिवसेना,भाजपा और कांग्रेस ही बचेगी। जो आम आदमी पार्टी कभी कांग्रेस को पछाड़कर इंडिया गठबंधन का सिरमौर बनना चाहती थी। पंजाब में टूट के बाद पंजाब भी उसके हाथ से निकलता दिख रहा है,साथ ही उसके कुछ कदम ऐसे हैं,जैसे साफ लगता हैकि उसकी पार्टी के लोग और वह स्वंयम अंदर खाने भाजपा से मिलकर कांग्रेस को कमजोर कर रही है,यही हाल वामदल का है,वायनाड में भारी विपत्ति के समय कर्नाटक से आई वित्तीय मदद को जप्त कर उसने वायनाड की जनता की जरूरत के समय कर्नाटक की मदद को रोककर केरल की जनता को भारी ठेस पहुंचाया उसका नतीजा यह रहा की केरल जो एकमात्र वामदल का गढ था,वामदल बुरी तरह परास्त होकर हाशिए पर चले गए। मैने हेडलाइन में इसीलिए लिखा है कि इंडिया गठबंधन की धुंधंली तस्वीर छंट रही है अब साफ है कि इंडिया गठबंधन में रहते हुए कांग्रेस की जड़ खोदने वाले दल जो क्षेत्रीय दल थे, काफी हदतक अपने-अपने राज्यों में हारकर या तो चुपचाप कांग्रेस नेतृत्व को स्वीकार कर लेंगे या भाजपा के साथ जायेंगे,केजरीवाल, तेजस्वी यादव, उद्धव और राज ठाकरे या ममता बनर्जी जो अपने मुख्य मंत्रितव के कार्यकाल में कांग्रेस और कार्यकर्ताओं को काफी जुल्म ढाये और अब इंडिया गठबंधन को एकजुट करने की बात करने लगी हैं या वामदल या NDA के सहयोगी रहे दल नवीन पटनायक या उनकी पार्टी बीजद हों,के. चंद्र शेखर राव या उनकी पार्टी या नीतीश कुमार या उनकी पार्टी का उनके राज्य सभा में जाने के बाद अब दुबारा अपने राज्य में लौट पाना बेहद मुश्किल है,एकमात्र यूपी में में अखिलेश यादव ने पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का खुलकर साथ दिया था, जिसके कारण सपा और कांग्रेस दोनों को इसका भारी लाभ मिला था- सम्पादकीय-News51.in
