Thursday, March 12, 2026
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टी-20 विश्व कप 2026- दो पालियों ने संजू सैमसन को विनोद काम्बली बनने से बचा लिया और शुक्रिया ललित मोदी का, जिन्होने आई.पी.एल.(इंडियन प्रीमियर लीग) का कांसेप्ट भारत में लांच कराया,जिसकी बदौलत छोटे-बड़े शहरों,अमीर-गरीब और जाति-धर्म से उपर उठकर सभी को उनके टैलेंट के हिसाब से मौका तो मिल रहा है

अब हम जरा सा क्रिकेट के(19वीं और 20वीं सदी में)तक के सफर पर नजर दौडायें तो साफ दिख रहा है,उस दौर में यह राजावों ,रजवाडों और नबाबों का क्रिकेट में साफ दबदबा दिख रहा है जिन्होने इस खेल का धन-दौलत से संरक्षण देकर इस खेल को कुलीन वर्ग का बना दिया और स्वंयम भी खेलते रहे।पटियाला,बडोंदरा ,नवानगर कूचबिहार जैसी रियासतों ने न केवल टीमों को बढावा दिया बल्कि शुरूवाती कई टीमों में इन राजघरानों के कई खिलाड़ी भी थे। पटियाला के महाराज भूपेंद्र सिंह ने 1911 में भारतीय टीम को पहलीबार इंग्लैंड भेजवाने में भारी योगदान किया था। कूचबिहार, बधवान और डूंगरपुर के राज परिवारों ने भी इस खेल को आगे बढाने में सक्रिय भूमिका निभाई। महाराजा रणजीत सिंह (जाम साहेब)जिन्हे क्रिकेट का भारत में पितामह कहा जाता है 1836 में इंग्लैंड की तरफ से खेलने वाले पहले खिलाड़ी बने। 1932 में पहली बार इंग्लैंड जाने वाली भारतीय टीम मे (पोरबंदर) के कप्तान और उप कप्तान (लुम्बडी) के दोनों राज परिवार से संबंधित थे।राजाओं ने कई क्रिकेट के मैदान बनवाए। पेशेवर खिलाड़ियों को रोजगार दिए। बडौंदा जैसी रियायत खेल को उच्च स्तर तक ले गए। 1950 आते-आते टीमें प्रतिभा आधारित होने लगीं, लेकिन सिर्फ बड़े शहरों बम्बई और बंगलौर जैसे शहरों के इर्द-गिर्द सिमट गई । बम्बई से पाली उम्रीगर,विजय मर्चेंट, नारी कांट्रैक्टर और रूसी मोदी, अजीत वाडेकर, दिलीप सर देसाई,सोल्कर,चंदू बोर्डे,सुनील गावस्कर जैसे खिलाडी रहे वहीं कर्नाटक से वेंकट राघवन, चंद्र शेखर, आ प्रसन्ना, विश्वनाथ जैसे खिलाड़ी रहे। बाद में दिल्ली, हैदराबाद, हरियाणा के खिलाड़ी भी आये, उनमें कपिलदेव, मदनलाल, मनोज प्रभाकर, वीरेंद्र सहवाग जैसे खिलाड़ी आये। कपिलदेव की कप्तानी में भारत ने पहली बार एक दिवसीय क्रिकेट मैच में चैम्पियन बना, बाद रांची जैसे छोटे शहर से आये महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत ने एक दिवसीय और टी-20 क्रिकेट का विश्व चैम्पियन बना था । अब तब के भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के उपाध्यक्ष और पंजाब क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष ललित मोदी ने 2008 में आईपीएल (इंडियन प्रीमियर लीग) की स्थापना की और पहले आईपीएल के कमिश्नर बने और उन्होने क्रिकेट में ग्लैमर भारी निवेश लाकर इसे वैश्विक ब्रांड बनाया।बाद में 2010 में उन्हे भारी वित्तीय अनियमिता के आरोपों के बाद लंदन चले गए और भारत की सरकार ने उन्हे भगोड़ा घोषित कर दिया। आज इसी आईपीएल टूर्नामेंटों की वजह से क्रिकेट में मात्र उनकी क्षमतानुसार उन्हे उचित सम्मान और धनराशि भी मिलने लगी है। अब बात करते हैं संजू सैमसन की, उन्हे भी विनोद काम्बली बनाने की पूरी तैयारी थी, संजू को पिछले 10 साल में सबसे ज्यादा बार लगभग 100 मैंचों मे बाहर बैठना पड़ा होगा और 12वां खिलाड़ी बनकर पानी पिलाना पडता था, लेकिन संजू सैमसन चुपचाप जब भी मौका मिलता, खेलते थे वह इस विश्व कप में भी शुरुआत के कुछ मैचों मे वह बाहर ही रहे। अभिषेक शर्मा के कुछ मैचों में आफ स्पिनर के खिलाफ कुछ मैचों की असफलता के बाद संजू को बल्लेबाजी मजबूत करने के उद्देश्य से क्वार्टर फाइनल में वेस्टइंडीज के 195 रनों की जिस कुशलता और धैर्य से तेज रन बनाकर भारत को जीत दिलाई वह काबिले तारीफ थी फिर सेमीफाइनल और फाइनल में जिस तरह तेज 80 से उपर दोनों मैचों में रन बनाकर भारतीय टीम को टी-20 का विश्व चैम्पियन बनाकर टूर्नामेंट का खिलाड़ी का खिताब जीता,उनकी शांत और साफ सुथरी तेज हीटिंग का जलवा दिखाया,पूरे भारतीयों को उनपर गर्व है संजू सैमसन गरीब ईसाई समुदाय से आते हैं इनके पिता एक साधारण कांस्टेबल हैं मैं ये भी नहीं कह सकता कि दलित समाज से आते हैं इससे पहले विनोद काम्बली और प्रवीण सिंह के साथ अन्याय हुआ था आईपीएल के ही कारण संजू सैमसन के साथ नहीं हो पाया और न ही रिंकू सिंह के कारण हो पायेगा-सम्पादकीय-News51.in

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