21 जुलाई 1993में तत्कालीन वामदल की सरकार ने कोलकात्ता में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी के नेतृत्व में कांग्रेस की रैली में हुई पुलिस फायरिंग में कांग्रेस के 13 कार्यकर्ताओं की मौत हो गई थी, तभी से ममता बनर्जी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी 21 जुलाई को पश्चिम बंगाल में शहीदी दिवस के रूप में हर वर्ष मनाती रही, बाद में ममता 20 मई,2011 को सत्ता में आने के बाद ममता बनर्जी इसे तृणमूल-कांग्रेस के लिए काफी बृहद पैमाने पर मनाने लगी, और कांग्रेस हाशिए पर चली गई, हालांकि कांग्रेस भी अलग से मनाती रही, लेकिन उसमें ज्यादा भीड़ नहीं होती थी, लेकिन अब तृणमूल-कांग्रेस सत्ता में नहीं है, तो भी तृणमूल-कांग्रेस के दोनों धड़ों और कांग्रेस तीनों ने इसे कल यानि 21 जुलाई को मनाने का आश्चर्यजनक रूप से मनाने का निश्चय किया और तृणमूल-कांग्रेस के शहीदी दिवस में स्वयंम ममता बनर्जी भी शामिल हुई, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से इस बार कांग्रेस के शहीदी दिवस में इतनी ज्यादा भीड़ आई, कि स्वयंम कांग्रेस नेतृत्व को भी इसका अंदाज नहीं था, इस शहीदी दिवस में कांग्रेस नेता अधीर रंजन और प्रदेश अध्यक्ष शुभंकर सरकार बेहद रोमांचित और प्रसन्न नजर आए और उसके बाद ममता बनर्जी की शहीदी दिवस में भी काफी भीड़ जुटी,लेकिन बागी गुट की शहीदी दिवस आश्चर्यजनक रूप से फ्लाप साबित हुई। कांग्रेस अध्यक्ष शुभांकर सरकार ने शहीदी मीनार पर उमड़ी भीड़ से उत्साहित होकर घोषणा की, कि 9 अगस्त से 15 अगस्त तक स्वतंत्रा दिवस के आयोजन में नुक्कड सभाएं और रैलियां पूरे प्रदेश में आयोजित की जायेंगी और झंडा रोहण में माननीय राहुल गांधी जी स्वंय एक जनसभा को संबोधित भी करेंगे।-सम्पादकीय-News51.in
पश्चिम बंगाल में 21 जुलाई1993 कोमारे गये13 कांग्रेस कार्यकर्तोओं की याद में हर वर्ष मनाया जाता है
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