साल भर में सात में छह राज्यों(पंजाब को छोड़कर) का राज्य वार चुनावी सम्भावनाओं पर दोनों मुख्य पार्टिओं भाजपा और कांग्रेस की राज्य वार जमीनी हकीकत और पार्टीओं के हार-जीत पर एक रिपोर्ट लिखना जरूरी है तो इस कडी में सबसे भारत के सबसे बड़े राज्य यूपी से करते हैं यूपी और गुजरात के सबसे मज़बूत गढ भाजपा के माने जा सकते हैं,यूपी में कांग्रेस वह जीरो वाला दल है, जो अकेले शून्य है, लेकिन किसी दल के साथ जुड़ाव होने पर एक से लेकर दो शून्य की तरफ बढ सकता है,अकेले है तौ शून्य रहेगा,लेकिन उसके पार्टनर सपा के साथ जुड़ाव पर 10-100-200+ भी हो सकता है,अकेले सपा 1-9 तक ही रहैगा। अतः चुनाव तो दोनों दल साथ फिर से मिलकर ही लडेंगे । अब कांग्रेस अपने को कितना यूपी में अपने को मज़बूत कर पायेगी ,यह तो भविष्य की बात है। कहावत है कि इंडिया गठबंधन के सभी घटक कांग्रेस के ही वोट आको लेकर पैदा हुए हैं, इसलिए इंडिया गठबंधन का कोई दल कांग्रेस को नहीं बढने देना चाहता, इसी कारण घटक दल अपना भी नुकसान कर लेते हैं, यहां सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव काफी समझदार माने जाते हैं इसीलिए पिछले लोक सभा चुनाव में उन्होने अपनी पार्टी के साथ कांग्रेस प्रत्याशियों का भी जमकर प्रचार किया था,नतीजतन भाजपा अकेले पूर्ण बहुमत प्राप्त न कर सकी थी, इस बार विधान सभा चुनाव तो अखिलेश यादव और उनकी पार्टी के लिए “करो या मरो” वाली स्थिति है,लेकिन यह तभी होगा जब कांग्रेस को 50-60 के बीच न सिर्फ सीट दे बल्कि अपने उम्मीद वारों के साथ-साथ कांग्रेस उम्मीद वारों को भी जिताने के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगा दे,और अखिलेश यादव ऐसा करेंगे भी।बाकी भाजपा की बात करें तो निःसंदेह वह यूपी में बहुत मज़बूत है, ऐसे में इस बार भी यूपी में भाजपा व उनके घटक दल यानि यूपीए एक तरफ और सपा+कांग्रेस(इंडिया गठबंधन) के बीच ही मुख्य लड़ाई है,कहने को तो बसपा,AiMIM जैसे अन्य क्षेत्रीय और छोटे दल भी मैदान में होंगे,लेकिन वह सब बस लड़ने के लिए लिए लडेंगे। अब बात उत्तराखंड की करते हैं यहां भाजपा की सरकार है हालाँकि कांग्रेस ने वहां की गुटबाजी से त्रस्त होकर गणेश गोदियाल को नया और लड़ने वाले को अध्यक्ष बनाया गया है और गणेश गोदियाल ने भी सभी गुटों को लेकर विपक्ष की भूमिका बखूबी सड़क से लेकर विधान सभा तक लड़ रहे हैं उपर से बीच में महिला उत्पीड़न का मामला भी किसी नेता पर लगा और वहां कांग्रेस और भाजपा दोनों दल अच्छी फाईट में हैं यही हाल गोवा का है,वहां पिछली बार आम आदमी पार्टी के अचानक उभार ने कांग्रेस की नैया की नैया डूबो दी थी, रही-सही कसर तृणमूल कांग्रेस ने भी कांग्रेस में पलीता लगाया था। इस बार आम आदमी पार्टी गोवा में काफी कमजोर हो चुकी है और तृणमूल कांग्रेस भी वहां से लुप्त प्राय हो चुकी है, इसीलिए इस बार वहां सीधी लडाई भाजपा और कांग्रेस के बीच है,हालाँकि वहां एक क्षेत्रीय पार्टी भी है। बात हिमाचल प्रदेश की करते हैं, वहां भी कांग्रेस के अंदर गुटबाजी है एक तरफ मुख्य मंत्री सुखविंदर सिंह सूक्खू और दूसरी तरफ दिवंगत कांग्रेस के पूर्व मुख्य मंत्री वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह हैं, जो रह-रहकर अपनी ही सरकार की आलोचना करते रहते हैं, हालाँकि मुख्य मंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का वहां काम सराहनीय रहा है यहां भी सीधी लडाई भाजपा और कांग्रेस के मध्य ही है,बात मणिपुर की करें , वहां भी कांग्रेस,एक क्षेत्रीय दल और भाजपा के मध्य है अंत में बात गुजरात की वहां आम आदमी पार्टी और कांग्रेस की आपस में नम्बर दो पर रहने की है, हालाँकि वहां भाजपा के खिलाफ लोगों में असंतोष है लेकिन अभी भी भाजपा को हराना वहां टेढी खीर है वहां जो दो मुख्य विपक्षी दल हैं वो कांग्रेस और आम आदमी पार्टी है,एक समय हालात ऐसे हो गए थे , लगता था,कांग्रेस को पछाड़कर आम आदमी पार्टी मुख्य विपक्षी दल बन जायेगा, लेकिन दिल्ली की सत्ता जाते ही केजरीवाल की पार्टी का पतन होने लगा और पंजाब में बड़ी बगावत के बाद आम आदमी पार्टी के हौंसले टूट गए और यह गुजरात के स्थानीय निकाय चुनाव में भी दिखा , अब तो पंजाब ही आखिरी सहारा आम आदमी का है, लेकिन वहां से भी केजरीवाल के लिए अच्छी खबर नहीं है,पंजाब की सरकार भी खतरे में है कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि गुजरात में एकबार फिर भाजपा का परचम लहराएगा-सम्पादकीय-News51.in
