पश्चिम बंगाल विधान सभा 2021 के विधान सभा चुनाव में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली थी,वोट परसेंट भी काफी कम हुआ था,अब इस बार कांग्रेस ने वामदलों से छुटकारा लेकर सभी 294 विधान सभा सीटों पर प्रदेश अध्यक्ष, प्रभारी के साथ राय मशविरा कर काफी सोच-विचार के बाद प्रत्याशीयों की घोषणा किया, दरअसल कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक लड़ाई के बीच अपने को तीसरा मजबूत त्रिकोण बनाने का प्रयास किया है, इसके लिए उसने पश्चिम बंगाल के सामाजिक और जातिगत सम्मीकरण से ज्यादा मुस्लिम समुदाय पर फोकस किया है,जिनकी पश्चिम बंगाल में लगभग 30 प्रतिशत के करीब है, जो कभी कांग्रेस के वोटर हुआ करते थे, इन्ही वोटर के बल पर तृणमूल कांग्रेस अब तक जीतती थी,अब इन्ही वोटरों के तृणमूल कांग्रेस से छिटक कर कहीं कांग्रेस के पाले में न चला जाए, यह डर भी अब ममता बनर्जी को है,इसी कारण अब अधीर रंजन के चुनाव प्रचार के दौरान उन पर तृणमूल कांग्रेस का हमला माना जा रहा है, कांग्रेस ने चुन-चुन कर प्रदेश के लगभग 40 धुरंधर बड़े नेताओं को चुनाव मैदान में उतारा है, जहां तृणमूल कांग्रेस ने 47 उम्मीद वार मुस्लिम समुदाय से उतारे हैं वहीं कांग्रेस ने 69 उम्मीद वार मुस्लिम समुदाय से उतार कर ममता बनर्जी के मन में भय ला दिया है कि कहीं उसका यह वोटर उससे छिटक कर कांग्रेस के पाले में नचला जाए। वैसे भी इस समय मुस्लिम समुदाय को एकमात्र कांग्रेस पार्टी ही भाजपा के मुकाबिले में जमकर लड़ती दिख रही है और इसी कारण असम में भी अजमतुल्लाह भी चुनाव में कहीं भी कांग्रेस के मुकाबले में नहीं दिख रहे हैं। कांग्रेस ने अपनी इसी रणनीति के तहत अधीर रंजन को उनके अपने गढ बहराम पुर से और मौसम नूर को मालती पुर से टिकट दिया है। इसी के साथ ही कांग्रेस ने क्षेत्रीय स्तर पर भी अपने पुराने गढ मालदा,मुर्शिदाबाद, उत्तरी दिनाज पुर और दक्षिण दिनाज पुर पर अपना विशेष महत्व दिया है,ये वही इलाके हैं, कभी कांग्रेस का गढ हुआ करते थे,वहां आज भी संगठन के स्तर पर कांग्रेस मज़बूत है,कांग्रेस अपनी नजर विशेष तौर पर मुस्लिम इलाकों पर है, जहां वह सही उम्मीद वार और समीकरण के सहारे कुछ सीटें जीत सकती है, उसकी पूरी कोशिश 10-15 सीटों को जीतने की है,ताकि आगे की चुनावी लड़ाई में वह अपनी दमदार उपस्थिति दर्शा सके।-सम्पादकीय, News51.in
