Sunday, May 26, 2024
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वर्तमान में सभी दल अपने को कांग्रेस का विकल्प और भाजपा के मुकाबले में अपने को मुख्य विपक्षी होने का दावा कर रहे हैं सभी विपक्षी दलों की कांग्रेस के वोट बैंक में सेधमारी से परेशान कांग्रेस

क्या समय है कांग्रेस का और क्या समय था कांग्रेस का 20 वीं सदी के उत्तरार्ध में, जब पूरा देश कांग्रेस मय था जैसे लगता था कांग्रेस का सूरज कभी अस्त नहीं होगा और आज समय ऐसा है कि कांग्रेस का दुबारा कैसे उदय होगा। वैसे तो छिट-फुट एकाध राज्य अपवाद स्वरूप अवश्य हुआ करते थे। जहाँ कम्युनिस्ट पार्टी अपनी जड़ें जमाए हुए थी। आखिर ऐसा क्या हुआ कि कांग्रेस तेजी से नीचे ढलान की तरफ जा रही है और उसी के खादपानी और छाया तले (यानि कांग्रेस के ही वोट-बैंक को छीनकर) क ई क्षेत्रीय पार्टीयों का उदय हो गया है और आज वे सभी कांग्रेस को उखाड़ फेंकने के लिए अंदर खाने भाजपा से मिल गये हैं और जैसे एक दुश्मन दूसरे को हराने के लिए राजनीतिक गोटियां बिछाई जाती है दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है, के तर्ज पर राजनीतिक गोटियां बिछ चुकी हैं। कुछ विपक्षी दलों को खाद्य पानी व अन्य तरह से आगे बढाने का कार्य सत्तारूढ़ दल द्वारा किया जा रहा है जिससे उनका फायदा और कांग्रेस को कमज़ोर यह दल कर सकें। उदाहरण के लिए पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी भाजपा की पिछली सरकार में शामिल थी और कांग्रेस के वोट बैंक को लेकर ही वो पश्चिम बंगाल में आज सत्ता में है और पश्चिम बंगाल के बाहर वह शून्य है लेकिन कांग्रेस का वोट काटने के लिए अन्य प्रांतो में अपना कैंडिडेट उतार रही है और चाहत है कांग्रेस को हर जगह से हराने की। अब अगर एक विधान सभा सीट पर वह दो हजार या उससे उपर वोट पाती है तो इसका मतलब दो हजार वोटों का कांग्रेस का नुकसान। क ई ऐसे विधान सभा क्षेत्र हैं जहाँ हार-जीत का अंतर 100-200 वोट होते हैं इसी तरह दो अन्य दल बसपा और ओवैसी की पार्टी। यह दोनों दल भाजपा को तो कोसते हैं किंतु वोट कांग्रेस का काटने और हराने का काम करते हैं एक अन्य दल केजरीवाल की आम आदमी पार्टी है। जिसने सबसे पहले दिल्ली में बिजली बिल मुफ्त करने के नाम पर वोट मांगा। तुक से यह ट्रिक काम कर गयी कांग्रेस का पूरा वोट बैंक केजरीवाल की पार्टी में शिफ्ट हो गया और दिल्ली में आप की सरकार बन गई भाजपा की भी बुरी हार हुई, फिर हरियाणा और पंजाब में और गोवा उत्तराखंड तक इसी मुफ्त योजना को लागू किया। पंजाब में भाजपा से जनता नाराज थी किंतु कांग्रेस नेताओं की सिर फुटव्वल और रोज-रोज की चिकचिक से और नवजोत सिंह सिद्धु की हरकतों से (अपने ही मुख्य मंत्री, अध्यक्ष और अन्य मंत्रियों की निन्दा से) पंजाब की जनता को केजरीवाल की पार्टी ही विकल्प दिखी और पंजाब में भी आप की सरकार बनी वहां भी जो वोटर कांग्रेस के थे, मजबूर हो आप को वोट देने को मजबूर हुए उत्तर प्रदेश में भी सपा और बसपा कत्त ई नहीं चाहते हैं कि कांग्रेस दोबारा यूपी में पनपे क्योंकि कांग्रेस के वोट बैंक पर वो यूपी में भाजपा को ललकारते हैं या ललकारने का नाटक करते हैं मुलायम सिंह यादव ने तो खुले आम प्रधान मंत्री मोदी जी को दुबारा प्रधान मंत्री बनने का आशीर्वाद भी संसद के अंदर दिया था यही हाल महाराष्ट्र में शरद पवार की पार्टी राष्ट्र वादी कांग्रेस पार्टी भी कांग्रेस के वोट बैंक को लेकर ही बड़ी हुई है और वह जबतक महाराष्ट्र में हैं कांग्रेस इसी प्रकार कमजोर रहेगी, केवल लालू प्रसाद यादव और कम्युनिस्ट पार्टी और डीएमके ही सही मायने में कांग्रेस पार्टी के साथ खड़ी तो है इस प्रकार देखा जाय तो भारतीय राजनीति में पार्टियां जनता को कुछ दिखाती और बताती है और कमाल की बात ये है कि जनता को सब मालूम रहता है फिर भी जानते बूझते जनता खुद भी असमंजस में रहती है। सम्पादकीय – News 51.in

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