अमेरिकी मध्यावधी चुनाव के पहले इस्राइल के आम चुनाव में राष्ट्र पति बेंजामिन नेत्यान्हू की पार्टी को चुनाव में पूर्ण बहुमत हासिल नहीं हो सका, अब विपक्षी दल के नेता और उनके मुख्य प्रतिद्वंदी,पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट जिन्हे अरब देशों का समर्थन भी प्राप्त था,को चुनाव में काफी फायदा हुआ है, लेकिन उनकी पार्टी को भी बहुमत हासिल नहीं हो सका, अब दोनों प्रमुख दलों ने छोटे-छोटे दलों का समर्थन प्राप्त करने के लिए बातचीत शुरू कर दी है। इस्राइल और अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से पूरे विश्व का राजनीतिक रूप से काफी-कुछ बदल गया है, वहीं इस्राइल के राष्ट्र पति बेंजामिन नेत्यान्हू ने विरोधी दल पर विदेशी फंडिंग (अरब देशों से) का चुनाव में फायदा उठाने की बात कही है, लेकिन चुनाव आयोग ने इसे सिरे से नकार दिया है।अब सबसे ज्यादा फायदा इन दोनों अमेरिका का मध्यावधि चुनाव और इस्राइल का आम चुनाव से इरान और अरब देशों का सबसे ज्यादा हुआ और उम्मीद वहां पर अब शांति की उम्मीद की जा रही है,अमेरिका में हुए मध्यावधि चुनाव में तो प्रति नागरिक को 5000 हजार डालर(लगभग 500000 रूपए)भी चुनाव जीतने पर अमेरिकन राष्ट्र पति ने घोषणा भी की थी, लेकिन लगता है, अमेरिकन जनता ने इसे भी अनसुना कर दिया। अमेरिकन उप राष्ट्र पति जेडी वांश ने भी इस पराजय के बाद राष्ट्र पति ट्रंप के खिलाफ बगावत का मोर्चा खोल दिया है, वहीं अब्दुल अल सैयद ने मिशीगन से चुनाव जीतने के बाद पहला शब्द कहा *हबीबी* यानी(मेरे प्यारे दोस्त),। उनका भी विदेश नीति पर ट्रंप से छत्तीस का आंकड़ा रहा है और गाजा में अमेरिकी सेना पर नरसंहार का आरोप लगाते रहे हैं।-सम्पादकीय-News51.in
इसराइल के चुनाव में किसी भी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला,राष्ट्र पति बेंजामिन नेत्यान्हू को लगा बड़ा झटका, अरब देशों से फंडिंग का बिना सबूत केआरोप लगाया
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