कैप्टन अमरिंदर सिंह को नवजोत सिंह सिद्धु के कहने पर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने मुख्यमंत्री पद से हटाने की जो भूल की, उसके बाद मुख्यमंत्री बनने की आस लगाए नवजोत सिंह सिद्धु को जब मुख्य मंत्री न बनाकर दलित वर्ग से चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्य मंत्री बना दिया गया, चरणजीत सिंह चन्नी ने कई अच्छे कदम जनता के हित को साधते हुए बनाए, लेकिन नवजोत सिंह सिद्धु ने चन्नी के हर कदम का यह कहकर विरोध करना शुरू कर दिया,” इतना बजट कहां से आयेगा” जिससे जनता कांग्रेसी नेताओं की आपसी लड़ाई से त्रस्त आकर आम आदमी पार्टी को जीभर कर वोट दिया, नतीजतन कांग्रेस की भयानक पराजय हो गई, तबसे कांग्रेस पार्टी अब तक पंजाब में नहीं उबर पाई, कांग्रेस के मुख्य मंत्री बने चन्नी दो जगहों से चुनाव लड़े और दोनों जगह हार हुई और चेन्नी इस हार से हताश विदेश चले गए, तब कांग्रेस ने राहुल की पसंद पर राजा वेडिंग को प्रदेश का अध्यक्ष बना दिया, लेकिन विदेश से दस माह बाद लौटे चन्नी को राजा वेडिंग का प्रदेश अध्यक्ष बनना जमा नहीं, उनको एक बार मुख्य मंत्री का चस्का लग चुका था, उनको लगा कि अगर कांग्रेस पंजाब में जीतेगी तो राजा वेडिंग मुख्य मंत्री बन सकते हैं, इसलिए इस बार जब विधान सभा चुनाव नजदीक आ गया, तो उन्होने कांग्रेस नेतृत्व से कहा कि उन्हे चुनाव बाद जीतने पर मुख्य मंत्री का चेहरा बनाकर चुनाव लड़ा जाय, इसके लिए चन्नी ने कांग्रेस के कैप्टन अमरिंदर सिंह के बाद सबसे सीनियर नेता सुखविंदर सिंह रंधावा,राणा गुरूजीत सिंह,भारत भूषण आशू,परगट सिंह,बरिंदरमीत सिंह पाहया,तृप्ति राजेंदर सिंह बाजवा सहित कांग्रेस के कई छोटे-बड़े लगभग 90 नेताओं को अपनी तरफ कर राजा वेडिंग को हटाकर किसी और को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की बात उठा दी, साथ ही राजा वेडिंग का साथ दे रहे तत्कालीन कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल को भी हटाने की मांग कर दी और राजा वेडिंग और भूपेश बघेल का जगह-जगह विरोध होने लगा, लेकिन बघेल ने खुलकर राजा वेडिंग को न हटाने की बात कही, बघेल ने जो रिपोर्ट कांग्रेस नेतृत्व को सौपी, उसमें चेन्नी के प्रभाव को एक सीमित दायरे के प्रभाव वाला नेता बताया, यही बात सुखविंदर सिंह रंधावा के बारे में कही, लेकिन मल्लिकार्जुन खड़गे ने अलग से एक रिपोर्ट मंगाई और उस रिपोर्ट में यह तो माना गया कि पंजाब में राहुल गांधी सबसे लोकप्रिय नेता हैं,लेकिन चेन्नी गुट की बगावत पार्टी की सम्भावना को काफी कमजोर कर रही है,तब कांग्रेस नेतृत्व ने बघेल को असम का प्रभारी बनाकर राहुल गांधी के विश्वस्त सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी इस आशय से बनाया गया कि वह दोनों गुटों को समान सम्मान देते हुए चरणजीत सिंह चन्नी और रंधावा गुट के साथ राजा वेडिंग को भी साधें, हालाँकि कांग्रेस नेतृत्व पंजाब को हर हाल में जीतने के लिए राजा वेडिंग को भी अध्यक्ष पद से समझा-बुझा कर किसी ऐसे नेता को अध्यक्ष की जिम्मेदारी देगी, जो किसी भी गुट में न हो,हालाँकि चरणजीत सिंह चन्नी भी समझ चुके हैं कि कांग्रेस नेतृत्व किसी को भी चुनाव से पहले मुख्य मंत्री पद का चेहरा बनाकर चुनाव नहीं लड़ेगी, क्योंकि इससे चुनाव जीतने की सम्भावना कमजोर होगी, तब चरणजीत सिंह चन्नी कांग्रेस नेतृत्व से लगभग 50 सीट पर अपने मनचाहे प्रत्याशियों को दिलाने की मांग कर दी थी,लेकिन प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट के बनने से दोनों गुट शांत हो गए हैं, यह भी तय है कि कांग्रेस पार्टी छोड़कर जाने का दम पंजाब के किसी कांग्रेसी नेता में नहीं है, लेकिन लगता है, कांग्रेस नेतृत्व भी अब पंजाब विधान सभा चुनाव में कांग्रेस की जीत की किसी को सर्वोपरि मानते हुए राजा वेडिंग का भी अध्यक्ष पद से जाना तय है, साथ ही किसी ऐसे अविवादित नेता को प्रदेश अध्यक्ष की कमान देगी, जो सर्वमान्य हो और इसीलिए सचिन पायलट को प्रदेश प्रभारी बनाया गया है और यही सचिन पायलट की असल परीक्षा भी होगी कि दोनों गुट पूरे मनोयोग से चुनाव प्रचार में एकजुट हो जाएं, हालाँकि राजा वेडिंग को मनाना ज्यादा मुश्किल नहीं होगा।-सम्पादकीय-News51.in
