वैसे तो अब तक पश्चिम बंगाल की लड़ाई तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच ही माना जा रहा है, लेकिन कांग्रेस के उम्मीद वारों की सूची देखकर ऐसा बिल्कुल नहीं लग रहा है कि कांग्रेस मात्र खानापूर्ती के लिए यह चुनाव लड़ रही है। यह सच है कि तृणमूल कांग्रेस और भाजपा की तुलना में कांग्रेस नेतृत्व ने देर से बल्कि पर्चा भरने की शुरुआती दिन पर अपनी पहली लिस्ट जारी की है माना जा रहा था अगर कांग्रेस पश्चिम बंगाल में लड़ती भी है, तो शायद अपना खाता खोल ले, वह भी किसी मज़बूत उम्मीदवार के कारण, कांग्रेस के कारण नहीं। अब कांग्रेस ने अपनी सूची जारी कर दी है, मात्र 10 और उम्मीदवारों का जारी होना शेष है, सम्भवतः एक-दो दिनौं में यह भी जारी हो जाए। सूची को देखने से स्पष्ट है कि कांग्रेस ने मुस्लिमों, अनुसूचित जाति/जनजाति ,महिलाओं और युवाओं पर अपना ध्यान केंद्रित किया है। पश्चिम बंगाल में मुस्लिमों ने आंख बंद कर ममता बनर्जी का अबतक साथ निभाया था ममता बनर्जी ने 2016 में47 मुस्लिम समुदाय से विधायक उतारा था लेकिन 2021 में कम उम्मीदवार उतारे । इस तरह कांग्रेस ने 69 मुस्लिम समुदाय के हैं उम्मीदवारों के चयन के समय अधीर रंजन चौधरी, यूपी से सलमान खुर्शीद, अम्बिका सोनी, पी.एल. पुनियां मीटिंग में रहे, वही प्रदेश के तमाम बड़े नेता उपस्थित रहे। अधीर रंजन को बरहाम पुर टिकट दिया है सोमेन मित्रा(वर्षों कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष) के बेटे को भी टिकट दिया गया है।अनुसूचित जाति के68,अनुसूचित जन जाति के 16 उम्मीदवारों, 44 महिलाओं को टिकट दिए गए हैं मुस्लिम समुदाय के72 लोगों को टिकट दिया जाना है कांग्रेस अपने गढ मालदा और मुर्शिदाबाद और उसके आसपास की सीटों को जीताने का जिम्मा मौसम नूर को दिया गया है खास बात ये है कि उन्हे उनकी मन माफ़िक सीट मालती पुर से टिकट दिया गया है । ममता बनर्जी के भवानीपुर से अनुसूचित जाति के प्रदीप प्रसाद को टिकट देकर साहसिक कदम उठाया है, अब तक पिछले कई चुनाव में कांग्रेस वामदल के साथ लड़ती थी, नतीजा शून्य रहता था, ऐसा वर्षों बाद कांग्रेस पहलीबार अकेले सभी सीटों पर चुनाव लड़ रही है अब तक यह तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के इर्द-गिर्द ही सिमटा रहता था कांग्रेस की शुरुआत शून्य से हो रही है इसलिए कांग्रेस को कोई नफा-नुकसान नहीं होना है, लेकिन ममता बनर्जी इसबार भाजपा के डर से हिंदुत्व की लहर पर भी चलने की कोशिश कर रही हैं इसीलिए भारी मात्रा में मुस्लिम समुदाय को टिकट देकर उसकी कोशिश यही है कि वह दहाई सीट पा जाय, लेकिन अगर कहीं भाजपा और तृणमूल कांग्रेस की दो पक्षीय लड़ाई में कांग्रेस तीसरा पक्ष बनने में जनता के बीच सफल रहकर 25-30 सीट हासिल करने में सफल होती है तो यह बड़ा चमत्कार ही माना जायेगा, क्योंकि कुल के बावजूद अभी भी पश्चिम बंगाल में 10% कांग्रेस के वोटर हैं, जो अब तक दबे हुए थे-सम्पादकीय- News51.in
