Saturday, July 13, 2024
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विराट कोहली के कप्तानी युग की समाप्ति के बाद भारतीय क्रिकेट टीम पुनर्निर्माण के दौर में है और अभी भी ड्रेसिंग रूम में तनाव की छाया

भारतीय टीम विश्व कप में पाकिस्तान से पहले मैच और न्यूज़ीलैण्ड से दूसरे मैच में (लगातार शुरू के दो मैचों की पराजय ने) भारतीय खिलाड़ियों को ऐसा मानसिक आघात पहुंचाया है कि पूरी टीम अभी तक उभर नहीं पा रही है। विश्व कप तक कोच रवी शास्त्री का कार्यकाल था लेकिन बीसीसीआई कप्तान विराट कोहली के नखरे और उनकी अति नाटकीयता ,खिलाड़ियों के चुनाव में दखलंदाजी से त्रस्त था और विश्व कप भारत चाहें जीतता, चाहे हारता, हर हाल में उन्हें कप्तानी से हटाने पर अमादा था इसी लिए महेंद्र सिंह धोनी को विश्व कप में मेंटर बनाया गया था ताकि रवी शास्त्री और कप्तान कोहली की मनमानी पर अंकुश लग सके। किसी को भारत की इतनी मजबूत टीम की पाकिस्तान से पहला मैच हारने की उम्मीद नहीं थी। भारतीय टीम पहले मैच तक ड्रेसिंग रूम में दबे छुपे दो गुटों में थी लेकिन पहला मैच पाकिस्तान से हारते ही विद्रोह खुल गया रही- सही कसर दूसरे मैच में न्यूज़ीलैण्ड से हार ने पूरी कर दी, भारत विश्व कप से बाहर हो गया था। अधिकारियों ने रिपोर्ट में पूरी तरह से विराट कोहली के तानाशाही रवैये को, कारण बताया और बीसीसीआई ने वन डे की कप्तानी छोड़ने के लिए भी विराट कोहली को कह दिया। उधर पाकिस्तान के खिलाड़ियों ने भारतीय स्पिनरों का यह कहकर मजाक उड़ाया कि पाकिस्तान में ऐसे स्पिनर हर गली मोहल्ले में मिल जाएंगे। खैर विश्व कप के बाद कप्तान विराट कोहली बदल गए लेकिन इस बीच दक्षिण अफ़्रीका से कोहली की कप्तानी में टेस्ट सिरीज बाद में केएल राहुल की कप्तानी में अब वन डे सीरीज भी 3-0 से भारत हार गई। 7-8 खिलाड़ी आजमाए गए। स्वयं विराट कोहली ने रन तो अवश्य बनाए। लेकिन अतीत की छाया मात्र लगे। अब भारतीय टीम खिलाड़ियों का सही संयोजन बनाने की जरूरत है। टीम पुनर्निर्माण के दौर में है। आप यह जान लिजिए। कुछ बालिंग, कुछ बोटिंग वाले खिलाड़ियों से काम चलने वाला नहीं। ऐसा लग रहा है कि आई पीएल 2022 होने के बाद कुछ नये खिलाड़ियों का उभार होगा उसी के बाद भारतीय टीम में नये जोश और आत्मविश्वास का संचार होगा। दूसरी सबसे बड़ी बात ड्रेसिंग रूम के माहौल को हल्का और खुशनुमा बनाना आवश्यक है सौभाग्य से भारत के कोच राहुल द्रविड़ एक अच्छे इंसान और खिलाड़ी होने के साथ बहुत ही अनुभवी कोच हैं परिस्थितियों को संम्भालने की क्षमता उनमें है। सम्पादकीय -News 51.in

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