Saturday, April 20, 2024
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यूपी चुनाव में सपा और भाजपा में टक्कर,क ई सीटों पर कांग्रेस भी जीत सकती है छठे चरण की एक दर्जन सीटों पर कांग्रेस मजबूत

[3/4, 12:36] Ashok Srivastava: अपने कद्दावर नेता आरपीएन सिंह के भाजपाई खेमे में चले जाने के बाद भी कांग्रेस के हौंसले पस्त नहीं हुए हैं। कांग्रेस यूपी के छठे चरण में गुरुवार को हुई 10 जिलों की 57 विधानसभा सीटों की वोटिंग में लगभग एक दर्जन सीटों पर मजबूत चुनौती पेश कर रही है। पार्टी का अनुमान है कि इस चरण में मजबूती के साथ चुनाव लड़ रहे अपने कई बड़े नेताओं के साथ वह कड़ी चुनौती पेश करने में कामयाब रहेगी। इससे उसकी 2024 की दावेदारी भी मजबूत हो सकेगी। इन चुनाव परिणामों से यह भी पता चल सकेगा कि यूपी में कांग्रेस को मजबूत करने की प्रियंका गांधी की मेहनत कितनी कामयाब हुई।
कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू तमकुही राज से ठोक रहे ताल
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू तमकुही राज विधानसभा चुनाव क्षेत्र से दोबारा मैदान में हैं। वे पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा की जबरदस्त लहर के बीच भी जीत हासिल करने में कामयाब रहे थे। उन्होंने भाजपा के जगदीश मिश्रा को 18 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था। सैंथवार जाति के वोटों पर अच्छी पकड़ इस पिछड़ी जाति के नेता की ताकत मानी जाती है। बदले चुनावी माहौल में उनकी लड़ाई आसान हो सकती है। उनका मुकाबला निषाद पार्टी के डॉ. असीम कुमार निषाद से है।     

देवरिया जिले की रूद्रपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अखिलेश प्रताप सिंह एक बार फिर से चुनाव मैदान में हैं। पार्टी की तरफ से मीडिया में कांग्रेस का पक्ष रखने में माहिर अखिलेश प्रताप की बड़ी ताकत जनता से उनका सीधा संपर्क होना है। पिछले विधानसभा चुनाव में उन्हें भाजपा उम्मीदवार जय प्रकाश निषाद के हाथों 26 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से हार मिली थी। लेकिन बदले हालात में वे कांग्रेस के मजबूत प्रत्याशी माने जा रहे हैं।

महराजगंज जिले की कई सीटों पर कांग्रेस मजबूत दावेदारी
जता रही है। 2017 के चुनाव में फरेंदा विधानसभा सीट से भाजपा के बजरंग बहादुर सिंह ने कांग्रेस उम्मीदवार वीरेंद्र चौधरी को दो हजार से कुछ अधिक वोटों के मामूली अंतर से हराया था। हालांकि, वे 2007 और 2012 में भी इस सीट पर जीत हासिल करने में कामयाब रहे थे। बजंरग बहादुर सिंह भाजपा के टिकट पर लगातार चौथी बार चुनाव मैदान में हैं। लेकिन कथित तौर पर उन्हें जनता की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है, वहीं बदले माहौल में कांग्रेस प्रत्याशी वीरेंद्र चौधरी को इसका लाभ मिल सकता है।

वहीं, महराजगंज जिले की सदर विधानसभा सीट पर भी कांग्रेस की स्थिति काफी मजबूत है। कांग्रेस प्रत्याशी आलोक प्रसाद इस बार इस सीट पर मजबूत लड़ाई लड़ रहे हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार जयमंगल ने बसपा उम्मीदवार निर्मेष मंगल को लगभग 68 हजार वोटों से हराया था। कांग्रेस उम्मीदवार आलोक प्रसाद 2017 में तीसरे स्थान पर रहे थे, लेकिन बदले माहौल में उन्हें इस सीट पर मजबूत प्रत्याशी बताया जा रहा है, जबकि सपा उम्मीदवार पर बाहरी होने के कारण जनसमर्थन कम होने की बात कही जा रही है।

सिसवां (महराजगंज) विधानसभा क्षेत्र (सुरक्षित) से कांग्रेस प्रत्याशी राजकुमार मजबूत लड़ाई लड़ रहे हैं। वे भाजपा के को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। सिसवां राजपरिवार के शिवेंद्र सिंह के परिवार से किसी सदस्य के चुनावी लड़ाई में शामिल न होने से यह लड़ाई कांग्रेस बनाम भाजपा के रूप में होती दिख रही है। इसी प्रकार सिद्धार्थनगर और इटवा विधानसभा सीट पर भी कांग्रेस मजबूत स्थिति में है। उतरौला (बलरामपुर) से कांग्रेस प्रत्याशी धीरेंद्र प्रताप सिंह धीरू अच्छी लड़ाई लड़ रहे हैं। वे भी कांग्रेस के लिए जिताऊ उम्मीदवार साबित हो सकते हैं। इसके अलावा कई अन्य सीटों पर भी कांग्रेस मजबूत दावेदारी पेश कर रही है। सम्पादक – अशोक कुमार श्री वास्तव News 51.in

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