Sunday, May 26, 2024
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मृतक आश्रित कम पढी लिखी चतुर्थ श्रेणी महिला कर्मचारीयो की समस्याये

  • आज मैंएक ऐसी समस्या को आपके सामने रखना चाहता हू जिसके बारे मे आज लोगो के पास सोचने का समय नही है लेकिन अगर आप थोड़ा सा भी इस समस्या पर विचार करेंगे तो आप के मन मे यह विचार अवश्य आएगा कि ऐसी स्थिति किसी के परिवार के साथ घटित हो सकती है । आप सोचिए कोई महिला अपने पति और परिवार के साथ सुखी जीवन जी रही हो ।पति अच्छी सर्विस कर रहा हो तथा दो या तीन बच्चे हो । 20-25 साल मजे से गुजर गए फिर अचानक पति की मौत के बाद पत्नी को कम पढी लिखी होने के कारण पति के आफिस मे चपरासी की जाब लगी काफी भागदौड़ करने के बाद ।जो महिला चारदीवारी के बाहर की दुनिया से दूर अपने परिवार मे ही जिन्दगी गुजार रही थी एकाएक सारी जिम्मेदारी सर पर पडते ही घबराती है यही पर अगर आफिस के स्टाफ का सहयोग आवश्यक होता है । अगर सहयोगी स्टाफ रहता है तो उनकी समस्या आसान और काम सीखने मे आसानी होती है ।समस्या तो तब होती है जब महिला अधिकारी, महिला चपरासीयो से अपने आवास का काम लेने लगती है महिला अधिकारीयो के साथ उनके माता-पिता, भाई बहन अक्सर रहने लगते है और महिला अधिकारी अपने रुतबे का दिखावा करने के लिए महिलाओ चपरासीयो को आफिस के काम से हटा कर घरेलू काम कराने लगती है और देर तक अंधेरा होने तक रोकती है ।उन्हे यह तक नही पता कि उस महिला चपरासी का भी परिवार है उसके भी बच्चे है उनकी भी समस्या है ।अधिकारी से ज्यादा उसके परिवार के लोग महिला चपरासीयो से अकारण परेशान कर खुश होते है अगर कोई चपरासी घर की परेशानी से अधिकारी को बताती है तो उन्हे निलंबित करने की धमकी या अन्य तरीके से परेशान करने की धमकी दी जाती हैं । उत्तर प्रदेश सरकार ने समय-समय पर सरकारी चपरासीयो से बंगले का अपना व्यक्ति गत कार्य न लेने या बंगले पर काम न लेने के सम्बन्ध मे शासनादेश और परिषदादेश जारी होते रहते है ।किन्तु अभी भी उत्तर प्रदेश मे कयी जिलो मे कयी ऐसी महिला अधिकारी है जो नियमो के विपरीत महिला चपरासीयो से आफिस का काम छोडवा कर अपने बंगले पर देर तक कार्य कराया जाता है ।और यह कहा जाता है कि मै भी महिला हू ।हालांकि अधिकांश महिला अधिकारी जो समझदार होती है ।वो आफिस की महिला चपरासीयो की ड्यूटी बंगले पर नहीलगाती है । सरकारी चपरासीयो से झाड़ू ,पूछा करने ,बर्तन माजने,खाना बनाने ,कपड़ा धोने से लेकर हाथ पैर तक दबवाया जाता है ।
    मेरा यह लेख लिखने का मात्र तात्पर्य यह है कि सरकारी कर्मचारीयो से व्यक्तिगत कार्य लेना सरकारी नियमो के विपरीत है ।कम पढी होने के कारण ,नियमो की जानकारी न होने के कारण ऐसी महिला चपरासी डरी डरी रहती है ।
    ऐसी महिला चपरासीयो को इसकी लिखित शिकायत बिना डरे उत्पीड़न करने वाले अधिकारी से उपर के अधिकारी से करनी चाहिए और उसकी प्रतिलिपि सभी बड़े अधिकारीयो को तथा महिला आयोग तक देनी चाहिए और सारी बातो का उल्लेख करना चाहिए यदि डराया धमकाया गया हो तो उसका भी विवरण होना चाहिए ।इसके साथ ही जितने मीडिया के लोग है, सामाजिक संगठन हो, अधिवक्ता समाज हो ।सभी को इस तरह की बातो मे पीड़ित पक्ष का समर्थन करना चाहिए ।कारण साफ है वेतन सरकारी कार्य करने का मिलता है ।बंगले का काम करने का नही ।

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