Monday, April 22, 2024
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मधुबाला -जिसने जिया एक ऐसा सफ़र प्यार का, जो ता-उम्र दर्द में जिया

एक ऐसा सफर प्यार का जो दर्द में जिया ता उम्र

फूल और खुशबु , अक्षर और स्वर , रंग और थिरक , प्रेम और वैर …….. जिन्दगी , कितने चेहरे लगाकर मिलने आती है जिन्दगी | वो टुकड़े टुकड़े मिलती गयी , मैं रेशा — रेशा बटोरता गया उसे ख्यालो और बेख्याली में तभी खरज के स्वरों में तैरती — सी किसी मछली ने पूछा मेरा नाम और मैंने मुस्कुराकर छेड़ दिया जिन्दगी का तराना
कोई समझेगा किसे समझाऊ दिलवाले की बात ………
एक हुस्न जिसकी दीवानगी में पूरी दुनिया रहती थी | फ़िल्मी दुनिया की सबसे खुबसूरत नायिका जो प्यार की देवी थी ……..जिनका जन्म प्यार के लिए हुआ वो थी मधुबाला
” इंसान किसी से दुनिया में एक बार मुहब्बत करता है ” मधुबाला एक ऐसा नाम एक ऐसी प्रेम पुजारन जिसे जिस — जिस ने जितना देखा उतना तरसता गया ऐसी नायिका जिसकी सुन्दरता स्वर्ग की किसी सुन्दरी से कम नही थी नीली आँखे —- साचे में ढला चेहरा दिलकश मुस्कान और तराशा हुआ संगमरमरी बदन जिसकी दीवानगी हर उम्र पे छायी रही जितनी रौशनी जितनी लपक जितनी गर्मी जितना हुस्न मधुबाला में था आज तक अजीम तरीन स्क्रीन पर जलवा फरोश नही हुई …
दिल ने जब प्यार की रंगीन फसाने छेड़े किसी पे मधुबाला का दिल आया मधुबाला ने जिससे शादी की वो भी असफल थी ……सबसे हसीन नायिका की शुरुआत हुई आठ साल की उम्र में तब की मुमताज दिल्ली छोड़कर अपने पिता अताउल्ला खा के साथ मुम्बई पर परचम लहराने निकल पड़ी | उस वक्त कोई था जिसने नन्ही मुमताज के कदम कुछ पल के लिए थाम लिया उसका सबसे बेहतरीन दोस्त लतीफ था जो मुमताज से बेहद मोहब्बत करता था मधु से दूर होने पर वो रो पडा तब मुमताज ने उसे लाल गुलाब देकर चुप कराया …..और वापस लौटने का वायदा किया | मधुबाला एक रहमदिल इंसान थी | मधुबाला तो कभी वापस नही लौटी मगर उस गुलाब को हमेशा लतीफ ने उसे सम्भाल कर रखा |
अब भी मधु की मौत के बाद हर साल उनकी मजार पे लतीफ जाते है मुमताज तो बम्बई आकर मधुबाला बन गयी मगर पहला प्यार दिल्ली ही छोड़ आई .1942 में बसन्त रिलीज हुई रातो रात नन्ही मुमताज स्टार बन गयी | बम्बई टाकिज की मालिकन देविका रानी और केदार शर्मा जैसे बड़े निर्देशक उनके मुरीद हो गये कहते है देविका रानी ने ही उन्हें मधुबाला नाम दिया
मधुबाला अब बड़ी हो रही थी नायिका बनने की तैयारी में थी | 13 साल की उम्र में ही केदार शर्मा ने अपनी फिल्म ” नीलकमल ” में उन्हें नायिका बना दिया | जानकार मानते है राजकपूर जैसे नए कलाकार की वजह से फाइनेंसर ने हाथ खीच ली तब केदार शर्मा ने अपना बंगला बेच कर फिल्म पूरी की | केदार शर्मा पत्नी की मौत के बाद मधुबाला को मन ही मन चाहने लगे थे | लेकिन मधुबाला की मोहब्बत की मंजिल केदार शर्मा नही थे |मधुबाला ने केदार शर्मा के प्यार का जबाब कभी नही दिया बल्कि उनको गुरु की तरह सम्मान देती थी साल 1948 कमाल अमरोही पूर्व जन्म पे फिल्म बना रहे थे | बम्बई टाकिज के बोर्ड डायरेक्टर सुरैया पे दाव लगाने को कहा पर कमाल अमरोही ने मधुबाला को लेकर फिल्म बनाई | 1949 में महल रिलीज हुई फिल्म हिट हुई उस वक्त के जानकार मानते है महल की कामयाबी कमल अमरोही और मधुबाला के प्यार का नतीजा थी कमल अमरोही मधुबाला से शादी करना चाहते थे मधुबाला ने कमल अमरोही से कहा कि वो अपनी पहली बीबी को तलाक दे दे पर अमरोही अपनी पहली बीबी से प्यार करते थे इसी वजह से अमरोही से उनका प्यार असफल रहा | 1951 गठीले बदन वाले प्रेमनाथ शूटिंग कर रहे थे प्रेम नाथ उनके नजदीक आये पर वो प्रेम भी ज्यादा दिन तक चला नही |
यही चौथी प्रेम कहानी का अंत हो गया साल 1952 में शम्मी कपूर मधुबाला के साथ फिल्म ” रेल का डिब्बा ” की शूटिंग कर रहे थे शूटिंग के दौरान शम्मी कपूर अपने संवाद भूल गये | शम्मी ने मधुबाला को शादी का प्रस्ताव दिया पर मजहबी दीवार ने इस की इजाजत नही दी और शम्मी की माँ ने इसकी इजाजत नही दी शम्मी कपूर मधुबाल से बेइन्तहा प्यार करते थे | दिलीप कुमार भी मधुबाला से प्यार करते थे इसके बाद 1953 और 54 का दौर मधुबाला के लिए सबसे हसीन दौर था |

दिलीप कुमार मधुबाला को उनके पिता अताउल्ला से आजाद करना चाहते थे पर मधुबाला के पिता नही चाहते थे | मधुबाला दिल के हाथो मजबूर थी |मधुबाला दिलीप कुमार को पागलो की तरह प्यार करती थी पर दिलीप कुमार से उनका प्यार नही चल पाया | मधुबाला का प्यार यहाँ भी असफल रहा | यही से आया मधुबाला की जिन्दगी में एक बड़ा मोड़ साल 1956 मधुबाला किशोर कुमार ढाका के मलमल की शूटिंग कर रहे थे | उस वक्त दिलीप कुमार मेकअप रूम में पहुंचे और उन्होंने कहा कि तुम कहो तो हम आज ही शादी कर लेते है पर मधुबाला अपने पिता के खिलाफ नही जा सकी |उसी वक्त दिलीप कुमार मधुबाला से दूर चले गये | इसी दौरान मधुबाला के दिल का सुराख बढने लगा पर मधुबाला ने अपने बेहतरीन अदाकारी से मुगले आजम को मील का पथ्थर बना दिया | शोहरत की बुलंदिया मधुबाला के कदमो में थी लेकिन तभी उनकी जिन्दगी में आया एक ऐसा नाम जो उनकी मौत के अंतिम दिनों तक जुडा रहा | ऐसे में उनको सहारा मिला किशोर कुमार का अब मधुबाला को एक अजीज हमसफर मिला 1960 में किशोर कुमार ने मधुबाला से शादी कर ली | उसके बाद किशोर कुमार ने मधुबाला को इंग्लैण्ड इलाज के लिए ले गये वहा के डाक्टरों ने कहा कि इनकी जिन्दगी बस एक साल की है | आखरी दिनों में चाँद सा दमकता चेहरा पीला पड़ गया था | 23 फरवरी 1969 घुप्प काली रात में जब सारी मुम्बई नीद की आगोश में थी बेचैन मधुबाला के दिल की धडकने भी चुपचाप सो गयी | 36 साल की उम्र में अधूरी ख्वाहिश और टूटे हए वायदों को समेटे वो रुखसत हो गयी ………..मुझे एक कैफ़ी की एक नज्म याद आ गयी |

कोई ये कैसे बता ये के वो तन्हा क्यों हैं
वो जो अपना था वो ही और किसी का क्यों हैं
यही दुनिया है तो फिर ऐसी ये दुनिया क्यों हैं
यही होता हैं तो आखिर यही होता क्यों हैं

एक ज़रा हाथ बढ़ा, दे तो पकड़ लें दामन
उसके सीने में समा जाये हमारी धड़कन
इतनी क़ुर्बत हैं तो फिर फ़ासला इतना क्यों हैं

सुनील दत्ता … स्वतंत्र.पत्रकार, दस्तावेजी प्रेस छायाकार

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