Friday, June 14, 2024
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कांग्रेस पार्टी में पुनःउर्जा लाने का प्रयास तेज,नौजवान नेताओं पर भारी जिम्मेदारी

कांग्रेस पार्टी में 23सिनियर नेताओं द्वारा गांधी नेहरु परिवार पर जिस प्रकार हमले किये गये। उससे एक बार तो ऐसा लगा कि इस बार कांग्रेस पार्टी में सब कुछ सही नहीं है। लोक सभा के चुनाव में कांग्रेस पार्टी की भारी पराजय से और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जी के इस्तीफे के बाद पुनः अध्यक्ष पद न लेने और प्रियंका गांधी को भी कोई पद न लेने की घोषणा के बाद पहले से कांग्रेस के कार्यकर्ता और बड़े नेता हतोत्साहित थे ।वह तो उस समय सोनियां गांधी को कार्यकारी अध्यक्ष बना कर पार्टी सलाहकारों पार्टी को और नुकसान होने से बचा लिया। सोनियां गांधी और प्रियंका गांधी के पुनः सक्रिय होने के बाद हरियाणा में भूपेंदर सिंह हुड्डा को अशोक तंवर के स्थान पर अध्यक्ष बनाए जाने पर कांग्रेस की लाज बची। इसी प्रकार राजस्थान की लड़ाई में भी सचिन पायलट को भाजपा की गोद में जाने से रोकने का काम तथा राजस्थान सरकार को मजबूती देना भी सोनियां गांधी और प्रियंका गांधी के साथ राहुल गांधी का प्रयास भी रंग लाया। काफी दिनों से क ई कांग्रेसी नेताओं द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष पद पर चुनाव कराये जाने का दबाव बनाया जा रहा था इसके लिए किसी अन्य दल का भी तथाकथित रूप से अपरोक्ष हाथ था या नहीं यह विवाद का विषय हो सकता है जो किसी भी तरह से कांग्रेस पार्टी में गांधी नेहरु परिवार का वर्चस्व समाप्त करने के लिए जी तोड़ प्रयास कर रहे हैं। सबसे मजेदार बात यह है कि जिन नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव करवाने की बात कही है।उनमें से सिर्फ भूपेंदर सिंह हुड्डा के अलावा कोई भी अपने राज्य में कोई जनता के बीच बड़ी पकड़ रखता है भूपेंदर सिंह हुड्डा भी कांग्रेस के बिना कुछ नहीं हैं सोनियां गांधी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वह किसी बात या आरोप का उत्तर नहीं देती हैं अपने कार्य से उत्तर देती हैं। हालांकि ये चुप्पी कभी -कभी हानिकारक भी होती है कल उन्होंने अपने राजनीतिक कदमों से क ई निशाने साधे हैं । वह समझ चुकी थीं कि बिना न ई पीढी के नौजवान नेताओं, जो सड़क पर कांग्रेस पार्टी की लड़ाई लड़ सकता है, कांग्रेस में मजबूती लाना असम्भव है 70कीउम्र में ड्राइंग रूम में बैठ कर बुजुर्ग नेताओं के भरोसे भाजपा जैसी काडर वाली पार्टी से राजनैतिक लड़ाई लड़ पाना असम्भव है। जिस प्रकार प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश की प्रभारी बनने के बाद संगठन जो मृतप्रायः हो गया था पर सबसे पहले ध्यान दिया। सभी जानते हैं कि बिना मजबूत संगठन और बिना मजबूत संगठन अध्यक्ष तथा लड़ाकू कार्यकर्ताओं के कोई लड़ाई नहीं लड़ी और जीती जाती है आज प्रियंका गांधी ने जो संगठन खड़ा किया है उसी की बदौलत आज कांग्रेस जनता की लड़ाई सड़क पर लड़ती दिख रही है। और सपा और अन्य विपक्षी दलों के मुकाबले नजर में रही है और बसपा तो सभी जानते हैं कि सरकार के साथ नजर आ रही है। इसी प्रकार असन्तुष्ट नेताओं और ऐसे नेताओं को जो काफी बुजुर्ग हो चुके हैं उनके स्थान पर नौजवान नेताओं को संगठन में बड़ी जिम्मेदारी देकर सोनियां गांधी ने बड़ा और महत्व पूर्ण कदम उठाया है कांग्रेस नेतृत्व को यह बात अच्छी तरह से समझनी होगी कि जबतक वह अपने को उत्तर प्रदेश के अलावा, पश्चिम बंगाल, आसाम, आंध्र प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उड़ीसा, हरियाणा और पंजाब, दिल्ली , और तेलंगाना में अपने संगठन को मजबूती नहीं देगी और अन्य विपक्षी दलों के साथ तालमेल और उनके सहारे रहेगी तो फिर उसका सत्ता में आने का सपना पूरा होना मुश्किल है। आपको मैं एक -राज्य के बारे में (जहाँ विपक्ष की सरकार है) बताना जरूरी समझता हूँ। पहला तो पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार है और कांग्रेस वहाँ वामदलों के साथ मिल कर लड़ती अवश्य है लेकिन अंदरखाने ममता बनर्जी से तालमेल चाहती है किंतु ममता बनर्जी कांग्रेस से तालमेल कर उसे पुनः मजबूत नहीं होने देना चाहती और कांग्रेस ममता बनर्जी को नाराज नहीं करना चाहती इसलिए वह पश्चिम बंगाल में अपने संगठन को मजबूत नहीं कर पा रही है। कांग्रेस नेतृत्व को समझना होगा कि ममता बनर्जी निर्णायक स्थिति में भाजपा का साथ दे सकती हैं किंतु कांग्रेस का साथ कत्तई नहीं देंगी ऐसा पूर्व में हो भी चुका है इसलिए दुविधा से निकल कर अपना संगठन और मजबूत लोकल नेतृत्व खड़ा करना अति आवश्यक है। आसाम में कांग्रेस अभी भी मजबूत है किंतु वहाँ तालमेल आवश्यक है क्यों कि भाजपा अब तक काफी मजबूत हो चुकी है । आंध्र प्रदेश में कांग्रेस ने के. चंद्रशेखर के बहकावे में आकर तेलंगाना राज्य का दर्जा देकर आंध्र प्रदेश की जनता को नाराज कर लिया। सोचा था कम से कम तेलंगाना राज्य के निर्माण से तेलंगाना की जनता उसे हाथोंहाथ ले लेगी लेकिन वहाँ तेलंगाना राज्य के निर्माण की लड़ाई में क ई आंदोलन चलाने वाले के. चंद्र शेखर ने कांग्रेस को झटका देते हुए स्वयं श्रेय ले लिया और वहाँ की जनता ने उन्हें वहाँ कांग्रेस को मायूसी मिली और आज वह एन डी ए का हिस्सा है। तेलंगाना राज्य के बनने से नाराज और नायडू से नाराज आंध्र प्रदेश में वाई आर एस कांग्रेस को जनता ने जिताया। हीरो बने जगन मोहन रेड्डी, जो पूर्व कांग्रेसी मुख्य मंत्री वाई. आर. एस. रेड्डी के पुत्र हैं। और आज वह भी एन डी ए के साथ खड़े हैं अब उनसे अल्पसंख्यक नाराज हैं उसका लाभ भी कांग्रेस नहीं बल्कि ओबैसी ने उठाया और पार्टी बना कर काफी वोट पाये आंध्र प्रदेश में अल्प् संख्यकों की अच्छी खासी संख्या है कांग्रेस नेतृत्व इन दोनों राज्यों में संगठन को लेकर उदासीन है ।जब कि नये बदलाव की जरूरत है नये मजबूत स्थानीय नेतृत्व की और संगठन की आवश्यकता है। सभी जानते हैं कि ओबैसी अंदरखाने भाजपा की ही मदद कर रहे हैं। यही हालत दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल की है उनके लिए कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में न जीतने के लिए वाक ओवर कर दिया ताकि वोटों का बंटवारा न हो सके। केजरीवाल भी आज भाजपा से मिल गये हैं, साफ दिख रहा है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, और पंजाब में फिर भी संगठन है और मजबूत है बस लोकसभा चुनाव के लिए स्थिति को और मजबूत करने की ज़रुरत है उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक भी एन डी ए के साथ खुल कर खड़े हैं। वहाँ भी कांग्रेस नेतृत्व नवीन पटनायक के खिलाफ खड़ा होने से बच रहा है वहाँ भी कांग्रेस का संगठन निष्क्रय है वहाँ भी स्थानीय, मजबूत नेतृत्व और लड़ने के लिए मजबूत संगठन खड़ा करने की दिशा में काम करने की ज़रुरत है। कांग्रेस नेतृत्व को एक बात स्पष्ट रूप से समझना होगा कि कमजोर को कोई नहीं पूछता। हर जगह पिछलग्गू बन के रहना कांग्रेस के लिए हितकर नहीं और न ही सबको खुश रखने की जरूरत है। राजनीति में सबसे ज्यादा जरूरी है अपने दल को मजबूती देना इसके लिए किसी से भी टकराने के लिए तैयार होना ज़रूरी नहीं तो कांग्रेस मजबूत नहीं हो पायेगी। हां बिहार में अभी राजद और कम्युनिस्ट पार्टी के साथ गठबंधन करना(विधानसभाचुनावमें) कांग्रेस के लिए आवश्यक है। लेकिन लोकसभा चुनाव के 3 साल पहले ही उपरोक्त सभी राज्यों में कांग्रेस को मजबूत स्थानीय नेतृत्व और नये और युवा नेताओं और कार्यकर्ताओं का मजबूत संगठन खड़ा कर लेना ही हितकर होगा। तीन साल पहले संगठन खड़ा करने से संगठन को भी जनता में अपनी मजबूती और पैठ बनाने का समय मिल जाएगा साथ ही सभी स्थानीय नेतृत्व को पूरी आजादी देनी होगी। क्योंकि लोकसभा चुनाव ही कांग्रेस के लिए असली कसौटी होगी। सोनियां गांधी ने एक काम यह भी अच्छा किया है कि कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण का गठन मधुसूदन मिस्त्री की अध्यक्षता में गठित कर दी है ताकि कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव भी कराकर पार्टी में असंतुष्टों को शांत किया जा सके।

सम्पादकीय News 52.in

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