पिछली 20 तारीख को जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट में दिल्ली पुलिस व अन्य बलों द्वारा जिस तरह बल प्रयोग हुआ और 10 अक्टूबर को जो कुछ भी हुआ और पहली बार जब जब अमेरिका से दिल्ली एयरपोर्ट पर अभिजीत दीपके का दिल्ली पुलिस द्वारा स्वागत कर वहींपर जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट की इजाजत दी गई सभी ने देखा,और 10 अक्टूबर को दिल्ली एयरपोर्ट पर जहाज के अंदर के वीडियोज लिए गए, वह भी ANI जो सरकारी प्रेस है, उसका प्रतिनिधी भी उसी जहाज में था,उसने सारे वीडियोज अभिजीत और उनके साथियों का जिस अंदाज में हीरो बनाते हुए जारी किया गया, क्या महज संयोग था, साथ ही पिछली 20 तारीख इन तीनों काकरोच के फाउंडरों को एक भी खरोंच का न आना और बाद के प्रोटेस्ट में बुखार होने के बहाने प्रोटेस्ट में शामिल न होना और 20 अक्टूबर को खुद ही प्रेस कांफ्रेंस कर, खुद ही दिल्ली से गायब होना और जहाज के अंदर गिरफ्तारी का वीडियोज सरकारी प्रेस द्वारा जारी करना महज संयोग था, वहीं एक दिन पूर्व 9 तारीख से अंडर ग्राउंड नेहाबोरा का एक्टिविस्टों योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण के साथ हाथ थामें भीड़ में जिस निर्भिकता से समूचे प्रोटेस्ट का नेतृत्व करना भी सबने देखा, जबकि वह लगातार 10 अक्टूबर के बाद भी और पिछले माह 20 तारीख के प्रोटेस्ट में भी प्रोटेस्ट का नेतृत्व करना और घसीट कर बस में लगातार गिरफ्तारी देना तमाम चोटो के बावजूद, नेहा बोरा को इस जेन जी आंदोलनों का सही नेतृत्व कर्ता भी जनता ने मान लिया है और सभी इन तीनों काकरोच फाउंडरों की पोल भी खोल दिया, उसपर कमाल यह कि अभिजीत दीपके की10 तारीख वाले प्रोटेस्ट में केजरीवाल और उनके सहयोगी भी शामिल हुए, है न ये सभी संयोग की बात?-सम्पादकीय-News51.in
