Friday, October 9, 2026
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त्रिपुरा- भारत का एक ऐसा राज्य,जहां आज भी राजा का राज्य चलता है, राजा, रजवाड़ों का समय भारत में समाप्त होचुका है, लेकिन त्रिपुरा में आज भी माणिक्य राजवंश के 186 वें राजा प्रदुत्य देव वर्मा का राज चलता है, अब उन्होने स्वास्थ्य कारणों से सक्रिय राजनीति से सन्यास लेने का ऐलान कर दिया है, लेकिन वहां के आदिवासियों के हितों की लड़ाई लड़ते रहेंगे

1978 को दिल्ली में जन्मे प्रदुत्य देव वर्मा माणिक्य वंश के 186 वें राजा बनाए गए हैं, हालांकि अब भारत में राजा, रजवाड़ों का युग समाप्त हो चुका है, लेकिन त्रिपुरा की जनता अपने राजा प्रदुत्य देव वर्मा को आज भी अपना राजा उन्हे मानती है,उन्होने आदिवासी समुदाय के हित में काम करने के लिए त्रिपुरा मोथा नामक पार्टी बनाई प्रदुय्मन देव के पिता किरिट देव वर्मा तीन बार कांग्रेस के सांसद रहे, उनके दादा भी कांग्रेस में थे और उनकी माता विभु कुमारी दो बार राज्य की राजस्व मंत्री भी रही हैं, उन्होंने भी अपनी राजनिती की शुरुआत कांग्रेस से की , उन्हे कांग्रेस अध्यक्ष भी बनाया गया, लेकिन NCR के मतभेद के कारण कांग्रेस से इस्तिफा देना पड़ा । बाद में उन्होने त्रिपुरा मोथा नामक राजनीतिक पार्टी बनाई। 2024 के विधान सभा चुनाव में 22 सीट। जीतकर तहलका मचा दिया और भाजपा के मुख्य मंत्री माणिक शाह को समर्थन देकर सरकार बनाई और लेफ्ट पार्टी का वर्षों पुराना वर्चस्व भी खत्म कर दिया। वहां की 1/3 आबादी आदि वासियों की रही है और 60 सदस्यीय विधान सभा में30 सीट आदिवासियों के लिए आरक्षित है,यद्यपि की वह नाम के सांकेतिक राजा हैं, नतो उनके पास सेना या पुलिस है और न ही कोई राजकीय मोहर, लेकिन वहां के आदिवासी उन्हे आज भी सम्मान और इज्जत देता है वे नार्थ इस्ट उनका महल आज भी गवाह है, आदिवासी उन्हे अपना राजा मानते हैं उनके राजनीतिक जीवन से सन्यास के बाद सबसे ज्यादा लाभ भाजपा को मिल सकता है, हालांकि वामदल भी अपनी खोई शक्ति को वापस पाना चाहेंगे, उधर कांग्रेस भी अपनी खोई जमीन पर जड़ जमाने का प्रयास करेगी।-सम्पादकीय-News51.in

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