Monday, March 4, 2024

पेडपौधेरिश्तेदारीऔरजीवन

रेडियो विज्ञान के पिता माने जाते डॉ (सर) जगदीश चन्द्र बसु भारत के पहले ऐसे वैज्ञानिक शोधकर्त्ता थे जिन्होंने एक अमरीकन पेटेंट हासिल किया था ! भौतिकी, जीवविज्ञान, वनस्पतिविज्ञान तथा पुरातत्व के साथ उन्होंने रेडियो और सूक्ष्म तरंगों की प्रकाशिकी पर कार्य किया और वनस्पति विज्ञान में भी कई महत्त्वपूर्ण खोजें की। उन्होंने रासायनिक इन्हिबिटर्स (inhibitors) का पौधों पर असर और बदलते हुए तापमान से होने वाले पौधों पर असर का भी अध्ययन किया था। अलग अलग परिस्थितियों में सेल मेम्ब्रेन पोटेंशियल के बदलाव का विश्लेषण करके वे इस नतीजे पर पहुंचे थे कि पौधे संवेदनशील होते हैं, वे “दर्द महसूस कर सकते हैं , स्नेह अनुभव कर सकते हैं इत्यादि “।

दिखावटी विकास की अंधी दौड़ में लगे हम लोग तो लेकिन एक पल भी नहीं सोचते इन्हीं पेड़ों का कत्ल करने से पहले ! विचार करते तो शायद हम खुद ही अपने और पूरी आदमजात के दुश्मन न बन गए होते। यह जानते हुए भी कि दुनिया में लगातार बढ़ रही गर्मी की वजह जंगलों का काटे जाना है, भू माफियाओं का इतना आतंक है, इतना गहरे छनती है उनकी निज़ाम के साथ कि कहीं पर भी कब्जे लायक जमीन देख कर वे नंगा नाचने लगते हैं ! उनके और अपने लालच की इस प्रवृत्ति पर किसी भी तरह की कोई लगाम नहीं लगाते हैं हम ! जहां देश 60 फीसदी आबादी की चिंता का विषय किसी तरह केवल खुद तो बचाए रखना हो, सिर्फ पांच किलो अनाज और एक किलो चने का हो, वहां पर्यावरण की कौन सोचे !

यही वजह है कि देखते ही देखते पेड़ पौधों के जंगल की जगह रात भर में ही कंक्रीट के जंगल ले लेते हैं। सुप्रीम कोर्ट भी थक जाता है इन भूमाफियाओं से मिली राज्य सरकारों पर कड़ी टिप्पणियां करते करते, लेकिन उन पर कोई असर नहीं होता ! बस्तर के बेलाडिला में लौह अयस्क के खनन के लिए हर साल 25 हजार पेड़ काटने का अदानी का प्रोग्राम तो बस इसका एक उदाहरण भर है, ऐसे कितने ही अदानी देश भर में यह काम कर रहे हैं ! ऐसे ही थोड़े न मेघालय के 300 पहाड़ गायब हो गए हैं देखते ही देखते !!

मेरा विश्वास है कि पेड़ों के बारे में ये जानकारियां आपको हैरान कर देंगी बशर्ते आपके पास इस पर गंभीरता से विचार करने के लिए एक मिनट का समय हो ! पेड़ धरती पर सबसे पुरानी जीवित इकाई हैं, और ज्यादा उम्र की वजह से ये कभी नहीं मरते। दुनिया का सबसे पुराना पेड़ यूरोप में स्वीडन के डलारना प्रांत में है। टीजिक्को नाम के इस पेड़ की उम्र 9,550 साल है और इसकी लंबाई करीब 13 फुट है।

दुनिया में हर साल करीब 5 अऱब पेड़ लगाए जरूर जाते हैं लेकिन उससे दोगुनी संख्या में यानि 10 अऱब पेड़ काटे भी जाते हैं। दुनिया भर में आदमी और पेड़ का अनुपात 1: 422 है अर्थात एक आदमी के लिए 422 पेड़ हैं जबकि भारत में यह 1: 28 है यानि एक आदमी के हिस्से में केवल 28 पेड़ ही आते हैं ! जिस रफ्तार से यहां पेड़ कट रहे हैं, यह अनुपात भी 1:1 होते देर नहीं लगेगी !

दुनिया में सबसे ज्यादा पेड़ रूस में है उसके बाद, कनाडा और ब्राज़ील का नंबर आता है और उसके बाद अमेजान जंगलों के लिए मशहूर अमेरिका में। इनके बाद पांचवें स्थान पर भारत है। कब तक बना रहेगा यह पांचवें स्थान पर, उत्तर भी बहुत जल्दी मिल जाने वाला है जंगल कटाई की रफ्तार को देखते हुए !

पेड़ अपनी 10% खुराक मिट्टी से और 90% खुराक हवा से लेते है हवा से पेड़ की खुराक है कार्बन डायक्साइड। एक एकड़ जमीन में लगे हुए पेड़ एक साल में इतनी कार्बन डायक्साइड सोख लेते है जितनी एक कार छोड़ती हैं 41,000 km चलने पर ! हवा की कार्बन डायक्साइड ही नहीं सोखते ये पेड़ बल्कि उसके बदले में जीवन के लिए जरूरी ऑक्सीजन भी छोड़ते हैं ! दुनिया की करीब 20% ऑक्सीजन तो अमेरिका के अमेजन जंगल ही पैदा करते हैं जो लगभग 8 करोड़ 15 लाख एकड़ जमीन में फैले हुए हैं। आदमी की तरह पेड़ भी बीमार हो जाते हैं और बीमार होने पर ये पेड़ कम ऑक्सीजन दे पाते हैं। कहा जाता है कि पीपल, नीम और बरगद के पेड़ दूसरे पेड़ों के मुकाबले ज्यादा ऑक्सीजन पैदा करते हैं।

रही पेडों से रिश्तेदारी की बात तो लोग उत्तराखण्ड कै चमोली जिले में सुन्दरलाल बहुगुणा, कामरेड गोविन्द सिंह रावत, चण्डीप्रसाद भट्ट तथा श्रीमती गौरादेवी के नेतृत्व में चले #चिपको_आंदोलन को भूल गए हैं शायद जब कटने वाले पेड़ों से ऐसे लिपट जाया करते थे लोग जैसे वे उनके सगे संबंधी हों। विश्नोई लोगों में भी ऐसा ही जनून देखा गया है !

अंग्रेजी कवि कीटस् की तरह अपना सर्वश्रेष्ठ दे कर 36 वर्ष की आयु में ही संसार को छोड़ देने वाले ‘विरह का सुल्तान’ के नाम से मशहूर पंजाबी कवि शिव कुमार बटालवी का एक गीत है ‘रुक्ख’ यानि पेड़ के नाम से जिसमें पेड़ों के साथ कई रिश्ते कायम किए है उसने ! कल ही इसका अनुवाद किया है ! आप भी इस गीत का आनंद लें :

कुछ वृक्ष मुझे बेटे लगते हैं, कुछ लगते हैं माई,
कुछ लगते बहू बेटी जैसे, और कुछ लगते भाई !

कुछ लगते मेरे दादू जैसे एक दो पत्ते वाले ही,
कुछ तो मेरी दादी जैसे, चूरी बना कर काग बुलाएं।

कुछ रुख मेरे यारों जैसे चूम चूम गले लगा जाएं ,
कुछ को गोद उठा कर लेकिन खेलने का मन चाहे।

एक मेरी महबूबा जैसा, मीठा और दुख से सरसाया,
कुछ को देखके दिल करता है कंधे बिठा कर गाऊं !

कुछ को देखके दिल करता है चुंबन ले मर जाऊं !
तेज हवा जब जब चलती है, मिल कर झूमते गाते,

इन सब की मैं सब्ज़ सी बोली,जी करता लिख जाऊं
यह भी तो जी करता मेरा दरख्त की जून में आऊं !

मेरा गीत जो सुनना चाहो, इनके झुरमट में आ जाना,
ये बिल्कुल मेरी मां जैसे हैं, ठंडी मीठी इनकी छाया !
गुरुचरण सिंह। प्रस्तुति- सुनिल कुमार दत्त स्वतंत्र पत्रकार

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