Sunday, April 14, 2024
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60 के दशक में रूपहले पर्दे पर छा गई थीं ये तीन अभिनेत्री आशापारिख, वहीदा रहमान और साधना, आशा पारिख को मिलना है -दादा साहब फाल्के पुरस्कार

हिंदी फिल्म दुनियां के रूपहले पर्दे पर समय -समय पर अभिनेताओं और अभिनेत्रियों की तिकड़ी अपना परचम लहराते रहे हैं चाहे अशोक कुमार, मोती लाल और के एल सहगल अपने समय के स्टारडम पाये रहे हों, फिर दिलीप कुमार, राजकपूर और देवानन्द का स्टारडम रहा हो या फिर राजेंद्र कुमार, धर्मेंद्र और मनोज कुमार का दौर रहा हो, फिर आये राजेश खन्ना जो, अबतक के इकलौते सुपर स्टार रहे उनके साथ जितेंद्र और शशिकपूर की तिकड़ी थी फिर अमिताभ बच्चन का दौर आया और फिर शाहरूख खान, आमिर खान और सलमान खान ।इन सभी के बीच अमिताभ बच्चन के दौर तक एक ऐसा भी कलाकार था जो राजेंद्र कुमार के दौर में ,आगे राजेश खन्ना की आंधी में जब सभी कलाकार फीके पड़े उस समय भी और फिर अमिताभ बच्चन के दौर में भी हमेशा अपनी चमक बिखेरता रहा ,वो थे धर्मेंद्र । इसी प्रकार अभिनेत्रियों का समय- समय पर अपना दौर रहा। नरगिस, मधुबाला और सुरैया का दौर था फिर सायरा बानो बबीता और शर्मिला टैगोर रहीं। उसके बाद 60 का दशक पूरी तरह से वहीदा रहमान, साधना और आशा पारिख के नाम रहा और उस दौर के लोगों को आज भी इन तीनों अभिनेत्रियों की याद होगी।उसके बाद हेमामालिनी, रेखा और मुमताज का दौर लम्बे समय तक चला। खूबसूरत आशा पारिख बेहतरीन नृत्यांगना और शोख नटखट और चंचल अदाकारी के लिए जानी जाती रहीं। उनकी जोड़ी धर्मेंद्र ,मनोज कुमार और राजेश खन्ना के साथ लोगों ने खूब पसंद किया । लव इन टोकियो, आया सावन झूम के, आये दिन बहार के, बहारों के सपने आन मिलो सजना, कटी पतंग, साजन ,उपकार, तीसरी मंजिल, प्यार का मौसम इनकी प्रमुख फिल्मे थी अब सरकार ने उन्हें फिल्म जगत के सबसे बड़े पुरस्कार *दादा साहब फाल्के पुरस्कार* से सम्मानित करने का निर्णय लिया है

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