Sunday, November 30, 2025
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स्वर्ग लोक में एक है इंदर, पृथ्वी पर हैं तीन इंदर , जय जितेंदर, जय धर्मेंदर,जय जय जय हो राजेंदर, ये उस युग का गीत था,जो दर्शाता है जब फिल्मी आकाश पर राजेंद्र, धर्मेंद्र और जितेन्द्र का राज था

1970 में एक फिल्म आई थी जिसका नाम था “आंसू और मुस्कान ” जिसमें एक गाना किशोर कुमार ने भजन कीर्तन के रूप में गाया था। उस गाने का बोल था। “चल चित्रम की कथा सुनायें,कथा सुनायें किशोर कुमारम”नामक गाने ने तत्समय के सिनेमा जगत के चित्रण को जैसे साकार कर दिया, विश्वास कीजिए वह दौर था राजेंद्र कुमार, धर्मेंद्र और जितेन्द्र का। राजेश खन्ना एक साल पहले ही स्टार बने थे, लेकिन राजेंद्र कुमार की गोरा और काला और सूरज अपने तेज से सबको चकाचौंध कर रही थी और धर्मेंद्र का तो क्या ही कहना,उनपर तो लगता था किसी के आने-जाने का कोई असर ही नहीं पड़ता था”तुम हंसी मैं जवां,रखवाला, नया जमाना,जीवन मृत्यु,कब क्यूं और कहां,मेरा गांव मेरा देश जैसी फिल्मों से तहलका मचा रखा था, उधर जितेन्द्र की फिल्म खिलौना,हमजोली, फर्ज, नया रास्ता, बिखरे मोती, दो भाई, बन फूल, हिम्मत आदि फिल्मों से अपने पूरे रौ में थे ,कहने का अर्थ यह है कि किशोर कुमार का यह पूरी तरह से भारतीय धरती पर लागू था फिर राजेंद्र कुमार की मौत हुई। लेकिन धर्मेंद्र का सितारा कभी डूबा ही नहीं, न हीं राजेश खन्ना की आंधी,और ना ही अमिताभ बच्चन का जमाना, कभी भी धर्मेंद्र का सितारा मद्धिम भी नहीं पड़ा। अमिताभ बच्चन का सितारा जब बुलंदी पर था उनके साथ धर्मेंद्र ने कई फिल्म की , चाचा भतीजा,चुपके-चुपके, शोले,राम-बलराम । सभी में धर्मेंद्र ने अपने अभिनय का लोहा मनवाया। 8 दिसम्बर 1935 में लुधियाना केनासराली गांव में हुआ था।धर्मेंद्र का पूरा नाम धर्मेंद्र केवल कृष्ण दयोल था एक जट सिख परिवार के थे पिता केवल कृष्ण सिंह दयोल स्कूल मास्टर थे। धर्मेंद्र ने दिलीप कुमार की फिल्म शहीद देखी और उनके दिवाने हो गए और सांईकिल से आते-जाते फिल्मों का पोस्टर में स्वंय को हीरो की जगह अपने को देखते-देखते इतना नशा सवार हुआ कि फिल्म फेयर कांटेस्ट में अपना भी एक फोटोग्राफ भेज दिया और तकदीर से उनका बुलावा आ गया।वहां मनोज कुमार और धर्मेंद्र सलेक्ट हुए, मनोज कुमार को पहले फिल्म मिली फिर 1960 में धर्मेंद्र को भी जल्द ही पहली फिल्म “दिल भी तेरा हम भी तेरे” रिलीज हुई, फिल्म कब आई, कब उतर गई पता ही नहीं चला कई जगह फिल्म मांगने गए लेकिन उनका शरीर की बनावट फुटबाल खिलाड़ी जैसी थी, यह ताना सुनते हुए कुछ फिल्म भी मिली फिर उन्हे उस समय के बड़े स्टार राजेंद्र कुमार की फिल्म “आई मिलन की बेला”मिली, फिल्म मेंउन्हे राजेंद्र कुमार के अपोजिट खलनायक की भूमिका मिली, जिसमें राजेंद्र कुमार के अभिनय की तुलना में उन्हे भी बराबरी की वाहवाही मिली और उनकी गाड़ी चल निकली और उन्होने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। फिर फिल्म” फूल और पत्थर ” में उनकी शरीर को देखकर उन्हे “हीमैन”की उपाधि मिली । अपने सपनों के हीरो दिलीप कुमार से जब पहलीबार मिले तो उन्हे देखकर दिलीप कुमार ने उन्हे गले लगा लिया और उनके सुंदर सुडौल शरीर और गोरे खूबसूरत चेहरे को देखते हुए कहा”काश मुझे भी खुदा ने इतना खूबसूरत बनाया होता”। 300 से अधिक फिल्मों में उन्होने काम किया1997 में उन्हे फिल्मों में योगदान के लिए फिल्मफेयर”लाइफटाइम एचीवमेंट एवार्ड “से सम्मानित किया गया। 2012 में उन्हे भारत सरकार की तरफ से पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनकी पहली शादी 1954 में प्रकाश कौर से हुआ था जिनसे चार बच्चे हुए दो पुत्र सन्नी दयोल, बाबी दयोल और दो पुत्री विजेता और अजीता थी। दूसरी शादी 1980 में फिल्म अभिनेत्री हेमा मालिनी से की जिनसे ईशा दयोल और अहाना दयोल दो पुत्रीयां हुई। फिल्मों में जमने के बाद उन्होने अपने भाईयों अजीत सिंह दयोल और विक्रम जीत सिंह दयोल को भी मुम्बई बुलाकर उन्हे फिल्म प्रोड्यूसर बना दिया। उनके भतीजे अभय दयोल भी फिल्मों में ऐक्टिंग करते हैं उनका संयुक्त परिवार है ।वह 15वीं लोकसभा में भाजपा के सांसद भी राजस्थान के बीकानेर से बने थे लेकिन राजनीति में उनका मन नहीं फिल्म अभिनेत्री मीना कुमारी के सम्पर्क में आ गए थे मीना कुमारी उन्हे पसंद करने लगी थीं, लेकिन वह अपने पति की बेवफाई से खिन्न शराब पीने लगी थीं, उनके सानिध्य में धर्मेंद्र को भी शराब की लत लग गई थी जब तक उनके शरीर में थोड़ी भी जान थी, उन्होने खूब जमकर शराब पी, नतीजतन उनका फेफड़ा काफी क्षतिग्रस्त हो चुका था जिसके कारण उन्हे सांस लेने में दिक्कत होने लगी थी और शरीर भी बुढापे के कारण काफी कमजोर हो चुका था चलने-फिरने में भी काफी दिक्कत होने लगी थी और वह बिना सहारे चल-फिर नहीं पाते थे बार पहली 1 नवंबर को सांस लेने की तकलीफ होने पर उन्हे मुम्बई की ब्रीच कैंडी हास्पिटल में भर्ती किया गया था12 नवंबर को सुबह उन्हे डिस्चार्ज कर दिया गया था, उस बीच कुछ मीडिया ने उनकी मौत की खबर भी उडा दी थी, जो बाद में गलत साबित हुई लेकिन तभी सबको यह एहसास हो गया था कि किसी भी समय उनकी मौत की खबर आ सकती है वही हुआ भी । 26नवम्बर की सुबह उनकी मौत हो गई। उनकी मौत के साथ ही एक युग का अंत हो गया,पृथ्वी का एक इंदर चला गया ,आखिरी इंदर जितेन्द्र उनसे 8 साल बाद फिल्मों में आये थे, लेकिन जो जुड़ाव या लगाव 50 वर्ष के उपर के लोगों का धर्मेंद्र से रहा वह न तो अमिताभ बच्चन और न ही जितेन्द्र से रहा होगा। धर्मेंद्र की महत्वपूर्ण फिल्में रहीं शोले, धर्मवीर, चुपके-चुपके,सत्यकाम, अनुपमा,सीता और गीता, फूल और पत्थर, मेरा गांव मेरा देश,अपने जैसी फिल्में रही-सम्पादकीय-News51.in

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