Monday, February 23, 2026
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कांग्रेस में राहुल गांधी ने अपने नौजवान, निष्ठावान कार्यकर्ताओं को अबतक उनकी क्षमता से प्रभावित होकर अब पार्टी में उन्हे बड़े पदों पर बैठाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है ?

राहुल गांधी ने अब अपने नौजवान और कर्मठ शील कार्यकर्ताओं को बड़े पद देना शुरू कर दिया है, इसके साथ ही पुराने योद्धाओं को उनकी क्षमता और उम्र के हिसाब से सदुपयोग करने का भी मन बना लिया है और जो अपनी ताकत का दुरुपयोग नेतृत्व को आंख दिखाकर राज्यसभा या बड़े पदों को हासिल करना चाहते हैं, उन्हे पार्टी में रहते हुए नजरअंदाज करने की तकनीक बनाई है हम पहले राहुल के पसंदीदा और मेहनती, कर्मठी नेताओं की बात करते हैं, फिर किनको नजरअंदाज करना है, उस पर भी बात करेंगे। सबसे पहले बिहार की बात करते हैं किशन गंज के सांसद डा.जावेद , जिन्हे पश्चिम तलाश जारी हैजैसे महत्वपूर्ण सूबे का प्रभारी बनाया गया है,डा. जावेद राहुल के अत्यंत प्रिय भी हैं,अगर पश्चिम बंगाल में डा. जावेद कुछ सीटें दिलाने में कामयाब होते हैं तो यह उनकी बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जायेगी,राजेश राम, कन्हैया कुमार, पप्पू यादव और तारिक अनवर हैं इसी के साथ पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह से अब दूरी बनायी जायेगी।यूपी में अभीतक कोई अच्छा व्यक्ति नहीं मिला है तलाश जारी है उत्तराखंड में हरीश रावत की सिफारिश पर गणेश गोदियाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है युवा गणेश और उर्जावान भी हैं वह वहां की सड़कों पर लड़ भी रहे हैं, राजस्थान में कई युवा नेता हैं, जो कांग्रेस की लड़ाई लड़ रहे हैं, इनमें सचिन पायलट आज भी कांग्रेस के लिए सर्वोपरि हैं मध्यप्रदेश में जीतू पटवारी जो राहुल गांधी के प्रिय हैं,प्रदेश अध्यक्ष भी हैं वह भी सड़कों पर जनता की लड़ाई लड़ रहे हैं, उमर श्रंगार हैं वहां भी कई नये नेता नौजवान आ रहे हैं राजस्थान और मध्य प्रदेश, तेलंगाना में रेवंतरेड्डी,कर्नाटक और बिहार में काफी नौजवान और जुझारू नेता निकल कर आ रहे हैं डी.के. शिव कुमार, इमरान मसूद, इमरान प्रताप गढी,छत्तीसगढ में बुजुर्ग टी. के. सिंह देव, भूपेश बघेल,हरियाणा से दीपेन्द्र हुड्डा, अशोक तंवर, हिमाचल में सुखविंदर सिंह सूक्खू,असम में गौरव गोगोई,वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष भी सड़क पर जनता की लड़ाई लड़ रहे हैं मुख्य रूप से कांग्रेस बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा,तेलंगाना, कर्नाटक में तो नौजवान और कर्मठ शील नेतागण लड़ रहे हैं, लेकिन हरियाणा में सूरजेवाला और कुमारी शैलजा के चलते प्रदेश कांग्रेस मज़बूत नहीं हो पा रही है और हिमाचल, तेलंगाना ,कर्नाटक में तो कांग्रेस की सरकार है इसी के साथ झारखंड और तमिल नाडु में उसी के गठबंधन की सरकार चल रही है कांग्रेस की असल समस्या यूपी,उडीसा, आंध्र प्रदेश, दिल्ली राज्य में है यहां यूपी के पूर्व अध्यक्ष अजय कुमार, लल्लू उड़ीसा के प्रदेश प्रभारी हैं,मेहनती और जुझारू हैं,सड़क पर प्रदेश अध्यक्ष के साथ जीवंत मुद्दों पर लड भी रहे हैं वहां लडाई काफी कठिन है यूपी,उडीसा, आंध्र उड़ीसा,पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के पास न तो नेता हैं, न ही कोई मजबूत चेहरा और जब तक इन राज्यों में कांग्रेस मज़बूत नहीं होगी ,तब तक कांग्रेस के लिए कौड़ी दिखती है अब बात करते हैं पंजाब और महाराष्ट्र की । महाराष्ट्र में मुम्बई की उषा गायकवाड महिला नेता हैं अनुसूचित जाति से आती हैं बेहद उर्जावान हैं साथ ही महाराष्ट्र अध्यक्ष हर्ष वर्धन सपकाले भी बहुत प्रयास कर रहे हैं, लेकिन पंजाब में नेता तो बहुत हैं और सभी अपने गुट को आगे बढाने और दूसरे के गुट की धज्जी उडाने में लगे हैं लेकिन बात वही कि जब तक कांग्रेस उडीसा ,पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश में अपना जनाधार को तैयार नही करती है सब बेकार है।-सम्पादकीय-News51.in

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