Sunday, November 30, 2025
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कांग्रेस में दो तरह के नेता, अब कांग्रेस नेतृत्व की जिम्मेदारी,कैसे नेताओं को आगे प्रदेश नेतृत्व सौंपना है ?

कांग्रेस का भला चाहने और मतलब परस्त दो तरह के नेता पार्टी में हर प्रदेश में हैं लेकिन कांग्रेस नेतृत्व सबको खुश करने और सभी को साथ लेकर चलने की अपनी पालिसी को लेकर चलने में पार्टी का ही नुकसान करने पर तुला है । राहुल गांधी पार्टी का भला चाहने में पार्टी का बहुत नुकसान कर चुके हैं। आज मैं उनकी कुछ नीतियों को आपके सामने रख रहा हूं। पहला तो जो पार्टी के प्रति वफादार भी हैं और दमदार भी हैं एक-एक कर प्रदेश वार नेताओं की बात करूंगा। सबसे पहले बिहार, जहां का विधान सभा चुनाव हो चुका है, एक तरफ राजेश राम, पप्पू यादव, शकील अहमद सरीखे नेता हैं, दूसरी तरफ अखिलेश प्रसाद सिंह और कुछ अन्य नेतागण हैं राजेश राम बिहार कांग्रेस अध्यक्ष बनाए गए और अखिलेश प्रसाद सिंह को हटा कर कांग्रेस की सीवीसी में सदस्य बनाकर सम्मानित किया गया। राजेश राम पर हार के बाद हुई दिल्ली की समीक्षा बैठक में प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावरू पर टिकट बंटवारे में पैसा लेकर टिकट बांटने का आरोप लगाया गया और शकील अहमद पर और पप्पू यादव पर भी तीन-चार लोगों को पैसा लेकर टिकट दिलवाने का आरोप लगा और राजेश राम चुप रहे, यह आरोप लगा तो अखिलेश प्रसाद सिंह ने अपने अध्यक्षीय कार्यकाल की तुलना राजेश राम से कर डाली तो राजेश राम ने तत्काल अपना इस्तीफा पार्टी नेतृत्व को सौंप दिया।अच्छा ही हुआ पार्टी नेतृत्व ने इस्तीफा अस्वीकार कर दिया,अब पप्पू यादव की बात करते हैं, जिन्होने लोकसभा चुनाव के ठीक पहले अपनी पूरी पार्टी का विलय कांग्रेस में कर दिया, लेकिन राजद के दबाव में और तत्कालीन अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह के षडयंत्र के चलते पप्पू यादव को पार्टी में शामिल नहीं किया गया, पप्पू यादव को निर्दलीय चुनाव लड़ना पड़ा, राजद के दबाव में कांग्रेस नेतृत्व उनका प्रचार भी नहीं कर सका,वह तो पप्पू यादव चुनाव जीत गये, यह अलग बात है,फिर विधान सभा चुनाव में कांग्रेस की बैठक में पहले तो नहीं बुलाया, बाद में बुलाया गया, तेजस्वी यादव की राहुल गांधी की संयुक्त रैली में पप्पू यादव और कन्हैया कुमार को तेजस्वी यादव के इशारे पर राहुल और तेजस्वी यादव की गाड़ी पर चढने नहीं दिया गया, मीडिया में भी इसे खूब बढा-चढा कर दिखाया गया, लेकिन न पप्पू यादव और न ही कन्हैया कुमार ने कोई ऐसा-वैसा बयान दिया उधर लगातार पार्टी लाइन से हटकर अखिलेश प्रसाद सिंह लगातार तेजस्वी यादव को मुख्य मंत्री पद का दावेदार बताते रहे और तो और उनके पुत्र आकाश सिंह किसी कांग्रेस प्रत्याशी का प्रचार करने के बजाय राजद प्रत्याशी सूरजभान सिंह की बेटी के प्रचार में व्यस्त रहे , इसके अलावा हर समय पप्पू यादव उपलब्ध रहे ,चाहें अशोक गहलोत को पटना एयरपोर्ट पर रिसीव करने की,चाहे कांग्रेस की कोई रैली हो, हर जगह पप्पू यादव मेहनत करते हैं, चाहें प्रशांत किशोर की युवाओं की रैली का जबाव देना हो तो पप्पू यादव, सच कहा जाय तो प्रदेश प्रभारी कृष्णाअल्लावरू, अध्यक्ष राजेश राम के बाद कांग्रेस के सबसे भरोसेमंद बिहार कांग्रेस में कोई है, तो वह हैं पप्पू यादव और कन्हैया कुमार, कांग्रेस पार्टी का यह सौभाग्य है कि पिछले 13-14 वर्षों में कांग्रेस के सत्ता में रहते सबसे ज्यादा मलाई जिसने खाई, वही सब पार्टी छोड़कर सरकार में शामिल हो गए, राहुल गांधी ने जिन पर आंख बंद कर भरोसा किया, एक-एक कर साथ छोड़ गए,लेकिन कांग्रेस आज भी पूरे दम के साथ खड़ी है,उनके कई गठबंधन के साथी, चाहे राजद हो या सपा, चाहते तो भाजपा के साथ जा सकते थे, नहीं गए, खासकर राजद, जिसका लालू प्रसाद यादव का पूरा परिवार चाहता तो भाजपा नीत गठबंधन से तालमेल कर अपने मुकदमों से छुटकारा पा सकता था,कांग्रेस के साथी बने हुए हैं, निर्दलीय सांसद परम्परागत सरकार के साथ चली जाती है, लेकिन पप्पू यादव ने कांग्रेस में इतना अपमान के बाद भी डंटे रहे, अब कांग्रेस नेतृत्व को सोचना है कि प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावरू, प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, पप्पू यादव और कन्हैया कुमार के साथ रहे या अखिलेश प्रसाद सिंह जैसे मतलब परस्त लोगों के साथ , अब बात कर्नाटक में डी. शिव कुमार और मुख्य मंत्री सिद्धा रमैया की करते हैं । यहां राहुल गांधी की एक ही तरह की गई गलतियों का भी जिक्र करना जरूरी है मध्यप्रदेश में माधव राव सिंधिया को दिग्विजय सिंह के कहने पर मुख्य मंत्री न बनने की सफल कोशिश कर कमलनाथ को मुख्य मंत्री बनवा कर दिग्विजय सिंह ने अपनी व्यक्तिगत दुश्मनी तो साध लिया, लेकिन माधव राव सिंधिया ने दलबदल कर कांग्रेस की सरकार ही गिरवा दी, आजतक फिर कांग्रेस की सरकार मध्यप्रदेश में नहीं बन सकी, फिर राजस्थान में सचिन पायलट को मुख्य मंत्री बनना था, लेकिन अशोक गहलोत षड्यंत्र कर मुख्य मंत्री बन गए और सचिन की बगावत के बाद किसी तरह उस समय सरकार बच तो गई, लेकिन चुनाव में भाजपा की जीत हो गई, जब कि चुनाव प्रचार के समय राहुल गांधी ने अशोक गहलोत और सचिन पायलट दोनों को मंच पर हाथ मिलाकर मतभेद दूर होने की बात कही, लेकिन राहुल गांधी को कौन समझाये कि हाथ मिलाने से दिल का मैल दूर नहीं होता, नतीजतन भाजपा की सरकार बन गई, जब कि विधायकों से बातचीत के लिए वर्तमान अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे यहां राजस्थान में चार दिन रुके रहे, लेकिन विधायकों से अशोक गहलोत ने मिलने नहीं दिया। अब कमाल देखिए, मध्यप्रदेश में आज भी उन्ही दिग्विजय सिंह और कमलनाथ की चलती है, जिनके षड्यंत्र के कारण कांग्रेस सरकार गिरी थी और तो और दिग्विजय सिंह स्वंय अपने साथ विवेक तंखा को भी लेकर राज्य सभा में पहुंच गए, यह सिर्फ कांग्रेस में ही सम्भव है, राजस्थान में आज भी अशोक गहलोत की कांग्रेस में चलती है,अब हरियाणा कांग्रेस की बात करते हैं, जब कुमारी शैलजा को अध्यक्ष पद से हटाकर अशोक तंवर को अध्यक्ष बनाया गया था , जब कांग्रेस में कोई सुधार नहीं हुआ तो भूपेंद्र सिंह की पैरवी पर उदयभान को अध्यक्ष बनाया गया और हुड्डा की मेहनत से हरियाणा में भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार बनी जो पूरे पांच साल चली फिर भाजपा जीत गई, पिछले दो चुनाव जीत गई, लेकिन यदि आखिरी चुनाव में कुमारी शैलजा ने भी प्रचार न कर केवल मीडिया कर्मियों को प्रतिदिन बुलाकर यही कहती रहीं कि मैं भी मुख्य मंत्री पद की दावेदार हूं और कभी प्रचार नहीं किया। वही हाल रणदीप सिंह सुरजेवाला का रहा,वह भी अपने को मुख्य मंत्री पद का दावेदार बताते रहे और केवल अपने लडके केचुनाव में प्रचार करते रहे एक बार राहुल गांधी के प्रचार के दौरान आई और वहां भी राजस्थान वाली गलती दोहराते हुए कुमारी शैलजा और भूपेंद्र सिंह हुड्डा का हाथ मिलवाया, लेकिन दिल नहीं मिलना,था,सो नहीं मिला, नतीजा कांग्रेस हार गई । आज भी कुमारी शैलजा और रणदीप सिंह सुरजेवाला ठसके से कांग्रेस में जमें हैं और हार के लिए भूपेंद्र सिंह हुड्डा को बताते हैं, जब कि असलियत ये है कि कांग्रेस में भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके पुत्र दीपेन्द्र सिंह हुड्डा ही अकेले कांग्रेस की लड़ाई लड़ रहे हैं अब डी. शिवकुमार, सचिन पायलट, जीतू पटवारी, पप्पू यादव, कृष्णा अल्लावरू,राजेश राम, कन्हैया कुमार और महाराष्ट्र में निर्दलीय सांगली के विधायक विशाल पाटिल जैसे मज़बूत कांग्रेसियों के बजाय अखिलेश प्रसाद सिंह, अशोक गहलोत, शशिथरूर, पी.चिदम्बरम, कुमारी शैलजा,रणदीप सिंह सूरजेवाला, दिग्विजय सिंह, कमलनाथ जैसे मौकापरस्त नेताओं को कांग्रेस नेतृत्व जब तक भाव देता रहेगा, कांग्रेस कभी आगे नहीं बढ सकती है-सम्पादकीय-News51.in

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