2016 के बाद के सभी चुनावों में, चाहे(विधान सभा या लोकसभा)का हो,भाजपा लगातार जीत रही है आइए जानते हैं कांग्रेस की समस्याओ को। इस बार कांग्रेस ने लेफ्ट पार्टियों के साथ रायजोड दल, असम जातीय दल,असम जनजातीय पार्टी, आल पार्टी हिल्स जैसी लोकल पार्टी से समझौता कर लिया है वहीं 2021 में बदरूद्दीन अजमतुल्लाह की पार्टी AIUDF के साथ मिलकर कांग्रेस ने चुनाव लड़ा था फिर भी भाजपा जीत गई थी । इस बार कांग्रेस ने पूर्वोत्तर के अपने सबसे मजबूत सिपाही गौरव गोगोई को असम की कमान दी है गोगोई ने बदरूद्दीन अजमल से यह कहकर कि वो भाजपा की बी टीम है और भाजपा को लाभ पहुंचाने के लिए और कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने के लिए कांग्रेस के विरूद्ध चुनाव लड़ रही है और तो और AiMiM के ओवैसी को भी चुनाव में कांग्रेस को हराने के लिए असम में बुला लिया है और बदरूद्दीन के साथ मिलकर चुनाव लड़ने से हिंदू वोटर एकमुश्त भाजपा को चले जाते हैं गौरव गोगोई के इस बयान की निन्दा करते हुए कहा कि मुस्लिमों पर बुलडोजर चलते हैं तो कांग्रेस चुप रहती है, केवल अल्पसंख्यकों का वोट चाहती है लोकसभा में भाजपा को असम में पिछले चुनाव में 9 सीट और कांग्रेस को मात्र 3 सीट मिली थी वहीं विधान सभा में भाजपा को 60 सीट और कांग्रेस के पास 29 सीट है, हेमंत विश्व शर्मा अपनी हिंदुत्व छवि, कठोर प्रशासक के दम पर असम में भाजपा को कांग्रेस के मुकाबले काफी आगे हैं सम्भवतः इसीलिए इस बार कांग्रेस ने गौरव गोगोई को खुली छूट दे रखी है और उन्होने भाजपा से टक्कर के लिए वहां की लोकल पार्टियों से गठबंधन किया है अब देखना है कि इस बार गठबंधन के सहारे कांग्रेस असम में क्या गुल खिलाती है-सम्पादकीय-News51.in
