Tuesday, April 23, 2024
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राष्ट्र पुरुष — चन्द्रशेखर

राष्ट्र पुरुष — चन्द्रशेखर

बेखबर कुछ पडा आतिशे नमरूद में इशक ,
अक्ल हैं महवे तमाशाए लबे बाम अभी ||

एक नजर – चन्द्रशेखर
अंग्रेजो के जाने के बाद चन्द्रशेखर जी अकेले ऐसे व्यक्तित्व हुए जो न तो किसी राजा या नेता के घर पैदा हुए , न ही कभी बड़े पूंजीपतियों ने उन्हें अपने काम का आदमीसमझ कर उन पर अपनी दौलत लुटाई और न ही कभी वह जमाने के पीछे चले | उन्होंने अपने जमाने की आँख में आँख डालकर और उससे पंजा लड़ाकर अपनी राह खुद बनाई | मुझे याद है , जिस समय श्रीमती इंदिरा गांधी ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए आपातकाल लगा कर पूरे देश को एक बड़े जेल में बदल दिया था , उस वक्त चन्द्रशेखर जी कांग्रेस से ही राज्यसभा के सदस्य थे | कांग्रेस में ऐसे बहुत से लोग थे जो श्रीमती गांधी के इस फैसले के विरुद्ध थे लेकिन चुप थे | केवल चन्द्रशेखर जी में इतना साहस था कि उन्होंने श्रीमती गांधी की तानाशाही के विरुद्ध आवाज उठाने में एक मिनट की भी देर नही लगाई | उनके इस फैसले ने मेरे जेहन में अल्लाम के शेर को ताजा कर दिया —
बेखबर कुछ पडा आतिशे नमरूद में इशक ,
अक्ल हैं महवे तमाशाए लबे बाम अभी ||
मैं आजमगढ़ का रहने वाला हूँ और चन्द्रशेखर जी का गाँव इब्राहिम पट्टी बलिया जिले में जरुर था लेकिन हमारे जिले की सरहद के करीब था | उन्हें राज्यसभा में जाने की जमीन आजमगढ़ के ही वीर पुरुष बाबू विश्राम राय ने तैयार की थी , इसलिए आजमगढ़ वाले हमेशा चन्द्रशेखर को अपना और चन्द्रशेखर आजमगढ़ को अपना मानते थे | इस बात को लेकर हमे बारबार गर्व होता है कि चन्द्रशेखर जी और उनके साथी रामधन जी कांग्रेस के सांसद होते हुए भी आपातकाल का विरोध करते हुए 18 महीने जेल में रहें लेकिन हालात से समझौता नही किया | मैंने तक़रीबन 60 साल पहले सरायमीर कसबे के भीतर वाले चौराहे पर देखा था | वह सोशलिस्ट लीडर की हैसियत से वहां भाषण करने आये थे | इस सभा में उन्होंने कहा था कि धर्म एक दुधारी तलवार है जो केवल काटती है जोडती नही हैं | राम ने शम्बूक वध धर्म को बचाने के नाम पर तथा यजीद ने हुसैन की ह्त्या धर्म को बचाने के नाम पर की थी | उस समय मैं सोशलिस्ट पार्टी का एक कार्यकर्ता था | उनके वक्तव्य के बाद मैं उनसे मिलने गया तो उनसे कहा की चन्द्रशेखर जी , आपको यह भी कहना चाहिए था कि स्टालिन ने जब बेटियों की हत्या , की तो उन्होंने कहा कि समाजवाद को बचाने के लिए यह आवश्यक था | चन्द्रशेखर जी मेरे प्रश्न पर मुस्कुराए | उन्होंने कहा कि आजमगढ़ का आदमी ही मुझसे यह सवाल कर सकता है | उन्होंने पूछा कि तुम किस गाँव के रहने वाले हो ? मैंने बताया की फूलपुर के पास स्थित बरौली का | फिर पता चला कि वह मेरे गाँव से पहले से वाफिक थे | चन्द्रशेखर जी के दिमाग का रिश्ता उनके जुबान से जीवन भर रहा | जो वह सत्य समझते थे , बोलते थे | इसके लिए कभी राजनीतिक लाभ – हानि की परवाह नही की | मुझे याद है एक चुनाव में कुछ मुसलमान नेता उनसे मिलने गये और कहा कि वह इस बार मुसलमानों को अधिक टिकट देवे | चन्द्रशेखर जी ने तपाक से कहा ! अच्छा मुसलमानों की कुछ समस्याए भी हैं | मैं तो समझता था कि मुसलमानों की समस्या केवल भाजपा है | जो पार्टी भाजपा को हराने की पोजीशन में हो मुसलमान उसी को वोट देते हैं चाहे भाजपा को हराने वाली पार्टी भाजपा से बुरी हूँ | मुझे याद है जिस समय पंजाब में आतंकवाद का बोलबाला था उसी समय अयोध्या आन्दोलन प्रारम्भ हुआ था | हिन्दू युवा सोच उससे प्रभावित हो चुकी थी | एक बार इस सोच के कुछ युवा लखनऊ में चन्द्रशेखर जी से मिले | यह लोग अयोध्या पर उनसे अपने अंदाज पे बात करने लगे | उन्होंने तेज बात करने वाले युवक को अपने पास बुलाया | देश में सिक्खों की संख्या बहुत कम हैं | उनमे से भी थोड़े ही नवजवान आतंकवाद के रास्ते पर चल पड़े है जो सम्भले नही सम्भल रहे हैं जिससे पूरा देश परेशान हैं | मुसलमान तो देश के हर भाग में हैं | कुछ लोग चाहते कि मुसलमान भी बागी हो जाए | मुझे समझ में नही आता कि यह लोग चाहते क्या हैं ? यही वजह है कि चन्द्रशेखर जी जब चार -पांच महीने के लिए प्रधानमन्त्री बने तो सबसे अधिक समय अयोध्या समस्या को बातचीत से सुलझाने में लगाए | मुझे 11वी और 14 वी लोकसभा में चन्द्रशेखर जी के साथ काम करने का अवसर मिला | दोनों बार वह पार्टी के अकेले सदस्य रहे | वावजूद इसके वह लोकसभा के सबसे अधिक प्रभावशाली सदस्य रहे | संसद में कोई फैसला तर्क या सच्चाई के आधार पर नही होता | संख्या की गिनती के आधार पर होता हैं | फिर भी चन्द्रशेखर जी जैसे खड़े होते पूरी लोकसभा श्रोता हो जाती जब वह कांग्रेस पर हमला करते तो सारे कांग्रेसी मेज थपथपाते थे , जब वह भाजपा की तरफ मुड़ते थे सारे गैर भाजपाई मेज थपथपाने को तैयार मिलते थे | संसद के नियमो के अनुसार संसद में बोलने का अवसर पार्टी सदस्य संख्या के आधार पर तय होता है | परन्तु चन्द्रशेखर जी हर नियमो से उपर थे | उन्हें समय के आधार पर किसी ने कभी नही टोका | चन्द्रशेखर जी एचडी देवगौड़ा की सरकार से काफी खुश थे | जब कांग्रेस के समर्थन वापस लेने के कारण देवेगौडा जी को लोकसभा में विश्वास मत लेना पडा तो वह काफी बेचैन थे | इस अवसर पर देवगौड़ा ने कहा कि मुझे मेरा कसूर बता दिया जाये , मैं तुरंत त्याग देने को तैयार हो जाऊँगा | कसूर कांग्रेस को बताना था | चन्द्रशेखर जी खड़े हुए और एक ऐतिहासिक भाषण देते हुए कहा कि सरकार का कसूर यही हैं कि|यह बहुत अच्छी सरकार अं इसका अपराध यह हैं कि पूरा देश इस सरकार से संतुष्ट है ? आज एक सौ वर्ष की पार्टी इस हाल में पहुच गई है कि समर्थन वापसी के पक्ष में उसके पास बोलने के लिए एक आदमी नही हैं | उन्होंने अटल जी की तरफ मुखातिब होते हुए कहा कि गुरु जी ! मैं आपसे कहूंगा कि आप प्रस्ताव का समर्थन करके कांग्रेस के के चेहरे से नकाब उतारे | इसके बाद कांग्रेस प्रियरंजन दास मुंशी सदन में आये | उन्होंने केवल इतना कहा कि समर्थन इसलिए वापस लिया जा रहा है कि सरकार हम चला रहे थे और हमी को समाप्त किया जा रहा हैं इतना कहकर वह सदन से निकल गये | चन्द्रशेखर जी फिर खड़े हुए उन्होंने अटल जी से गुरु जी !आप कांग्रेस का खेल देखिये | तब अटल जी
ने कहा कि इस सरकार से हमें कोई शिकायत नही | सरकार अच्छी है , लेकिन हमें तो विपक्ष के धर्म निर्वाह करना हैं | चौदहवी लोकसभा चल रही थी | मैंने लोगो से पूछा चन्द्रशेखर जी नजर नही आ रहे तो लोगो ने बताया कि बीमार चल रहे हैं | दूसरे दिन ही उन्हें उठाए हुए चार आदमी आए मैं सदन में दौड़कर उनके पास गया तो मैं समझ गया कि वह सदन को अंतिम बार देखने आये हैं | फिर चंद दिनों बाद खबर मिली राष्ट्रनायक हमारे बीच नही रहे |
जानकार मिजुमल , खासाने मयखाना मुझे ,
मुद्दतो रोया करेंगे जामो पैमाना मुझे |
प्रस्तुती — सुनील दत्ता – स्वतंत्र पत्रकार – समीक्षक

लेखक -इलियास आजमी –
पूर्व सांसद वर्तमान में आम आदमी पार्टी के नेता नेता

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