Sunday, April 14, 2024
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यूपी विधान सभा चुनाव 2022,सभी दलों की तैयारीयों पर एक नज़र और कैसे न जीते भाजपा, एक विश्लेषण

उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनाव फरवरी मार्च में तक हो जाएगा और सरकार का गठन भी हो जाना है सभी दलों ने अपनी -अपनी पार्टीयों की तैयारी तेज कर दी है। भाजपा जगह-जगह विकास योजनाओं की घोषणा और उद्घघाटन,शिलान्यास लोक-लुभावन नारे और घोषणाएं कर रही है और निषाद पार्टी, अपना दल अनुप्रिया पटेल के अलावा मानव समाज पार्टी, मुसहर आंदोलन मंच(गरीब पार्टी), शोषित समाज पार्टी, मानव हित पार्टी, भारतीय सुहेल देव जनता पार्टी, पृथ्वी राज जनशक्ति पार्टी, भारतीय समता समाज पार्टी के साथ गठबंधन कर अपनी उपलब्धियों को जनता को बता रही है उधर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी अनेक दल के नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल करते जा रहे हैं ,ओम प्रकाश राजभर की पार्टी से सपा ने तालमेल कर भाजपा को झटका दिया है सबसे ज्यादा नुकसान मायावती की पार्टी के नेताओं को अपने दल में शामिल करा कर बसपा का किया है इसके अलावा कांग्रेस के भी कई महत्व पूर्ण नेता और छुट भैये नेता भी भाजपा और सपा में शामिल हुए हैं। सपा इस बार भाजपा को उत्तर प्रदेश से उखाड़ फेंकने की उम्मीद लगाये बैठी है तीसरी पार्टी मायावती की बसपा है जो भाजपा से मिली -भगत के आरोप के बाद पार्टी से छिटके अल्पसंख्यक समुदाय की भरपाई ब्राह्मण सम्मेलनों के जरिए करना चाहती है उसके अधिकांश बड़े नेता सपा में शामिल हो गए हैं और हो रहे हैं फिर चंद्र शेखर उर्फ रावण ने भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाकों में अपनी पैठ युवा वर्ग में काफी बढाई है जो मायावती के लिए मुसीबत बनती जा रही है मायावती ने भी भाजपा के बजाय सपा और कांग्रेस को अपना निशाना बनाया हुआ है और भाजपा से भी ज्यादा इन दोनों दलों को निशाने पर लिया हुआ है और ऐसी उम्मीद है कि अल्पसंख्यक और ब्राह्मण समाज को ज्यादा टिकट बसपा देगी। रही बात कांग्रेस की, तो प्रियंका गांधी ने जबसे उत्तर प्रदेश का जिम्मा सम्भाला है भरपूर मेहनत कर रही हैं। वह जानती हैं कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस संगठन तकरीबन ध्वस्त हो चुका है तो उन्होंने पुराने संगठन में बैठे मठाधीशों को ,जो कांग्रेस संगठन में बीसों साल से बिना कुछ किए बैठे हुए थे उन्हें हटा कर नया संगठन खड़ा किया जिसके कारण पुराने तमाम नेता नाराज होकर अन्य दलों में चले गए लेकिन प्रियंका गांधी अपने हिसाब से बिना घबड़ाये काम कर रही हैं पुराने नेताओं के जाने से ज्यादा अच्छा नया संगठन सड़क पर सरकार से लड़ते दिख रहे हैं प्रियंका गांधी जानती थी कि सपा और बसपा की तरह उनके दल के पास कोई वोट बैंक है इसलिए उन्होंने 40 प्रतिशत महिलाओं को टिकट देने का एलान कर सभी दलों के कान खड़े कर दिए हैं किसानों की लड़ाई भी सड़कों पर कांग्रेस ही लड़ती दिखी और भी बहुत से चुनावी वादे कांग्रेस ने किए, जैसा सभी दल कर रहे हैं। एक बात तय है कि मायावती जहाँ पर लड़ाई में नहीं रहेंगी वहाँ सपा या कांग्रेस को हराने के लिए भाजपा को जीतवाने का प्रयास करेंगी। जहाँ तक भाजपा की बात है वह मजबूत तो है लेकिन उसे सपा से खतरा है लेकिन चाहे भाजपा हो, सपा या बसपा और आम आदमी पार्टी हो ,कोई नहीं चाहेगा कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश में मजबूत हो। फिलहाल ओवैसी की पार्टी से तालमेल कर कोई भी दल अपना नुकसान नहीं करना चाहेगी क्योंकि बंगाल चुनाव के बाद से अल्पसंख्यक भी ओबैसी से(भाजपा से मिली-भगत का आरोप) दूर हुए हैं। अभी उत्तर प्रदेश में गठबंधनों का दौर चलेगा। स्थिति और परिस्थिति में बहुत फेर-बदल होगा। प्रसपा सपा के साथ मिल कर चुनाव लड़ेगी या कांग्रेस से तालमेल करेगी चंद्र शेखर उर्फ रावण का दल का तालमेल किससे होगा, आम आदमी पार्टी और तृणमूल दूसरे दलों के निकले या निकाले गए लोगों को टिकट देगी या किससे तालमेल करेगी यह सब चुनाव की घोषणा होने तक ही स्पष्ट होगा। सम्पादकीय -News 51.in

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