Tuesday, April 23, 2024
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महान जन गीतों का क्रांति दूत पीट सीगर- आवाम की आवाज़ का एक बेमिसाल नुमाइंदा

आवाम की आवाज का एक बेमिशाल नुमाइंदा ——

जनगीतो का क्रांतिदूत——

27 जनवरी 2014 के दिन पीट सिगार की मौत के साथ प्रतिरोध संगीत का एक युग समाप्त हो गया | पीट सीगर ने प्रितिरोध व प्रगतिशील संगीतज्ञो और साथ ही पश्चिमी लोक संगीतज्ञो की कई पीढियों का पालन – पोषण अपने हाथो से किया था | इन संगीतज्ञो में बाब डिलन डान – मक्लीन – बर्निस जानसन रीगन आदि शामिल है | 3 मई 1919 को जन्मे पीट सीगर का 94 वर्ष का जीवन जनता को समर्पित था | सीगर का जन्म एक संगीत घराने में हुआ था उनके पिता चार्ल्स सिगार एक संगीत विशेषज्ञ थे , जबकि माँ कास्टैस आर्केस्ट्रा में वायलिन वादक थी | पीट जब छोटे थे , तभी पिता ने उनका परिचय लोक संगीत से करा दिया था | माता – पिता अक्सर ही उन्हें संगीत कार्यक्रमों और लोक संगीत समारोह में ले जाते | ऐसे ही एक समारोह में पीट ने पांच तारो वाले बैंजो को पहली बार देखा और सूना | आगे चलकर यही वाद्य यंत्र उनके प्रिय वाद्य यंत्रो में से एक बना जिसे वह अन्त तक बजाना पसंद करते रहे | ऐसे संगीतमय वातावरण में पीट को संगीत ने अपने अन्दर आत्मसात कर लिया पीट जल्द ही युकेलेले बजाने लग गये | पीट के माता पिता शुरू से ही युद्द विरोधी और शान्तिवादी विचारों से प्रभावित थे उसका असर बालक पीट पर भी पड़ा | जब पीट बड़े हुए तो उन्होंने हावर्ड विश्वविद्यालय के आइवी काली में दाखिला मिल गया | लेकिन दो वर्षो के बाद ही वह विश्व विद्यालय की पढ़ाई छोड़कर न्यूयार्क चले आये | यहाँ पर उनका परिचय लोक संगीत और संस्कृतियों के जानकार एलन लोमैक्स से हुआ | लोमैक्स ने उनका परिचय एक ब्लूज संगीतकार हुडी लेडबेटर से कराया जिन्हें लेड बेली के नाम से जाना जाता था | पीट सीगर पर सबसे शुरूआती प्रभाव लेड बेली का ही था | इसके बाद न्यूयार्क में ही उनका परिचय प्रसिद्द प्रगतिशील संगीतकार गायक और गीत लेखक वुडी गुथरी से हुआ | 1940 में वुडी गुथरी और पीट सीगर ने कैलिफोर्निया के अप्रवासी मजदूरो के लिए एक संगीत कार्यक्रम का आयोजन किया | इसके बाद सीगर ने गुथरी के साथ मिलकर लगभग संयुक्त राज्य अमेरिका की यात्रा की और इस यात्रा के दौरान वे विभिन्न लोक संगीत विधाओं और गीतों को जुटाते रहे , उनका अध्ययन करते रहे | पीट सीगर की शैली पर इस पूरे दौर पर असर दीखता है | 1940 में पीट ने दो अन्य संगीतकारों लैम्पेल और हेज के साथ मिलकर ”अल्मानाक सिंगर्स” नामक एक बैंड बनाया | यह बैंड मजदूरों के प्रदर्शनों हडतालो पिकेट लाइन आदि पर प्रगतिशीलता और प्रतिरोध गीत पेश करता | 1942 में पीट सीगर अमेरिकी कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य बने जिसका ढाचा उस समय एक मॉस पार्टी का ढाचा था | लेकिन इस पार्टी ने अपने राजनितिक प्रचार में उस समय संगीत को सबसे ज्यादा महत्व दिया था | विशेष तौर पर लोक संगीत को , कयोकि ऐसी धारणा थी कि लोक संगीत जनता का संगीत है और जनता उसके साथ तुरंत अपना तादात्म्य स्थापित कर लेती है | आज इस पूरी सोच पर प्रश्न खड़ा किया जा सकता है , लेकिन निश्चित तौर पर उस दौर में प्रतिरोध संगीत की लोक शैली का इन संगीतकारों ने और विशेष तौर पर पीट सीगर ने जमकर इस्तेमाल किया | ऐसा भी नही था कि पीट लोक शैली में कोई बदलाव नही करते थे | वास्तव में , उनकी लोक शैली किसी एक जगह , जाति या देश की लोक शैली नही थी | एक वैश्विक लोक शैली बन चुकी थी | अमेरिकी , स्पेनी ,अफ्रीकी और लातिनी लोक शैलियों तक का इस्तेमाल और उनका मिश्रण पीट सिगार स्वतंत्रता और लचीलेपन के साथ करते थे और इसीलिए वह कोई स्थानीयतावादी लोक शैली नही रह गयी , बल्कि एक वैश्विक लोक शैली का रूप ले चुकी थी | बहरहाल कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्यता के दौर में पीट सीगर ने विशेष तौर पर अमेरिकी मजदुर आन्दोलन में प्रगतिशीलता और प्रतिरोध संगीत के अपने औजारों के जरिये शानदार हस्तक्षेप किया और उसे सांकृतिक शक्ति दी | आज यह कहना अतिश्योक्ति नही होगा कि अमेरिकी प्रगतिशील संगीत पर पीट सीगर का बहुत भारी ऋण है | पीट सीगर बहुत गहरी राजनितिक और विचारधारा के साथ पार्टी से नही जुड़े थे | वह दौर 1940 के दशक का दौर था ; पूरी दुनिया में कम्युनिज्म की और विशेष तौर पर सोवियत संघ की गरीबी और मेहनतकशो के हितो के रखवाले के तौर पर तूती बोल रही थी | बुर्जुआ सरकारे भयभीत होकर हर प्रकार के मजदुर आन्दोलनों को कम्युनिस्ट घोषित करके उसका दमन कर रही थी | यह चीज इन आन्दोलनों को और भी बढ़ा रही थी | एक ऐसे दौर में पीट सीगर पार्टी की सदस्यता ग्रहण की | 1949 में उन्होंने पार्टी की छोड़ दी | परन्तु पीट सीगर आजीवन कम्युनिस्ट बने रहे | | पीट सीगर का जनता और उसके लक्ष्यों में यह जिद्दी भरोसा अपने जीवन के संघर्षो से भी पैदा हुआ था | जब सीगर ने ”अल्मानाक सिंगर्स ” समूह बनाया था और उसके बाद वे अपने बैंड के साथ मजदूर आन्दोलनों में संगीतमय प्रस्तुतिय देने लगे उस समय से ही अमेरिकी गुप्तचर की नजर उन पर थी | | जब मैकार्थी के दौर में ”हाउस कमेटी अनअमेरिकन एक्टिविटीज” बनी , तो उसके सामने पेशी के लिए सीगर को भी बुलाया गया | यही दौर था जब ”अल्मानाक सिंगर्स ”इस राजनितिक दबाव को झेल नही सका और बिखरने लगा | कयोकि इस कमेटी के सामने पेशी के मामले की शुरुआत से पहले ही कुछ राजनितिक गीतों के लिए ऍफ़ बी आई सीगर के पीछे पड़ चुकी थी | बहरहाल सीगर ने कमेटी के सामने अपने राजनितिक विचारों और पक्षधरता से जुड़े सवालों का जबाब देने से इनकार कर दिया | | बदले में पीट सीगर ने उन गीतों को कमेटी के सामने गाने का प्रस्ताव रखा जो गीत कमेटी की आपत्तियों के दायरे में थे | जाहिर है कमेटी ने इससे इनकार कर दिया और उन पर कमेटी का अपमान करने का आरोप लगाया और उन्हें एक वर्ष की जेल हो गयी | दण्ड की यह अनुशंसा करीब एक दशक तक सीगर के सिर पर लटकती रही | | लेकिन इस पूरे दौर में भी सिगार अपने गीतों को स्वर देते रहे और पूरे अमेरिका में घूमकर प्रगतिशील और लोक प्रितिरोध जारी रखे और 1959में ”न्युपोट फोक फेस्टिवल” की स्थापना की | 1960 के दशक की शुरुआत से विशेष तौर पर दक्षिण अमेरिकी में अश्वेत नागरिको के अधिकारों और उनकी स्वतंत्रता के लिए जन गीतों से क्रान्ति के स्वर को पैदा किया | 1962 में एक अदालत ने उनके लिए सजा कि अनुशंसा को गलत बताया और उसके बाद सीगर फिर से मुख्यालय में वापस आये | 1949 में अल्मानाक सिंगर्स के बिखराव के शुरुआत के बाद सीगर ने अन्य बैंड ‘ दी वीवर्स ‘ बनाया जो काफी सफल रहा |
जब सिगार मुख्यधारा में वापस आये तो यह लोकप्रतिरोध संगीत का पुनरुत्थान का दौर
था | मार्टिन लूथर किंग जूनियर के नेतृत्व उसमे मजदूरों की भी विचारणीय हिस्सेदारी हो रही थी |
वास्तव में जो गीत इस आन्दोलन का एंथम बना यानी ‘ वी शैल ओवरकम ” ‘ से निकला था | वियतनाम युद्द के शुरू होने पर सिगार ने इसका खुलकर और पुरजोर शब्दों में विरोध किया | इस पर उन्होंने एक प्रसिद्द गीत लिखा ‘ वेस्ट दीप इन द बिग मंडी ”| 1960 के दशक में ही सीगर ने पर्यावरण के मुद्दे को भी उठाना शुरू किया | उन्होंने हडसन नदी में कारपोरेट कम्पनियों द्वारा फैलाए जा रहे प्रदुषण के खिलाफ ‘ किल्यरवाटर कैम्पेन ” शुरू कर दिया | कई दशको के संघर्ष के बाद उनका यह प्रयास रंग लाया और जनरल इलेक्ट्रीकको नदी की ड्रेजिंग शुरू करनी पड़ी |इस पुरे दौर में सीगर ने बड़े प्यारे और मानवीय सरोकारों वाले गीत लिखे | बच्चो के गीतों को पीट बेहद दिल से लिखते और संगीतबद्द करते थे | सीगर ने 1990 के दशक में भी अपनी कापती आवाज में जन सभाओं और आन्दोलनों में गाते रहे | सीगर आज हमारे बीच नही है पर आज उनके लिखे गीत विश्व में न्नये परिवर्तन की आवाज बनी है —– लाल सलाम पीट सीगर तुम्हे

प्रस्तुती — सुनील दत्ता – स्वतंत्र पत्रकार — समीक्षक आभार — आह्वान पत्रिका से

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