Friday, June 14, 2024
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भारतीय क्रिकेट टीम की दुर्दशा, आये थे सम्भावित विजेता बन कर और आसान ग्रुप में फिसड्डी, लगभग विश्व कप से बाहर ,हार के कारणों का पोस्ट मार्टम तो होगा ही

एक कहावत भारतीय टीम टीम पर सटीक बैठती है ” बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से निकले” जिस भारतीय टीम ने अभी एक महीने तक शारजाह और दुब ई की इन्ही मैदानों में आई पीएल खेला था और विश्व का बड़े से बड़ा क्रिकेट का जानकार भी भारतीय टीम को सम्भावित विजेता मान कर चल रहा था और प्रैक्टिस के दोनों मैचों में इंग्लैंड और आस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीमों को हरा कर अपना मजबूत दावा भी पेश कर दिया था फिर अचानक ही टूर्नामेंट के शुरूआत से ही भारतीय टीम एक दम से नौसिखिया नजर आने लगी। पाकिस्तान के साथ पहले मैच में टास हारकर पहले बल्लेबाजी करते समय शुरू की दो विकेट केएल राहुल और रोहित शर्मा बेहद अच्छी गेंदों पर आऊट हुए बाकी सभी सामान्य गेंद आऊट हुए। हद तो ये कि भारत के विश्व स्तरीय तेज गेंदबाज (बुमराह, शमी और भुवनेश्वर कुमार) एकदम साधारण गेंदबाज नजर आये और तो और कप्तान कोहली सहित सभी भारतीय खिलाड़ियों की गर्दन झुकी थी मानो पहले से ही हार मान चुके थे कोई जोश न बालरों न ही फिल्डरों में दिखा। कहीं कोई प्लान नजर आया न कोई तैयारी नजर आई। भारतीय गेंदबाज 20 ओवर में एक भी विकेट नहीं ले सके ,लगा कभी- कभी एकाध दिन ऐसा हो जाता है सभी भारतीय प्रशंसक और क्रिकेट विशेषज्ञों ने बड़ी बेसब्री से 31 अक्टूबर का इंतजार किया और लगा कि आगे भारत अवश्य जीतेगा लेकिन न्यूज़ीलैण्ड के मैच में तो भारतीय खिलाड़ी इतना खराब खेले कि भारतीय प्रशंसकों का सर शर्म से झुक गया। हारने में शर्म नहीं लेकिन जिसतरह से भारतीय टीम खेली वह दुखद था। सभी खिलाड़ी हवाई शाट खेल रहे थे और लग रहा था न्यूज़ीलैण्ड के खिलाड़ियों को कैच की प्रैक्टिस करा रहे हों,110 रन बड़ी मुश्किल से बने और भारतीय बालरों ने तो हद ही कर दिया । 14.3 ओवर में 2 विकेट के नुकसान पर 111 रन बना डाले। ये दोनों विकेट बुमराह ने लिया। मिसट्री बालर वरूण चक्रवर्ती दोनों मैचों में एक भी विकेट नहीं ले सके। दोनों मैचों में भारतीय बालरों ने मात्र दो विकेट (दोनों बुमराह) प्राप्त कर सके। अब भारतीय टीम लगभग विश्व कप से बाहर हो चुकी है। तो भारतीय टीम के हार के कारणों का पोस्ट मार्टम भी होगा ही। अभी हाल ही में इन्ही मैदानों पर आईपीएल के मैच खेले गए थे और टूर्नामेंट के अगले हिस्से जो शारजाह और दुब ई में खेले गए उसी के लगभग अंतिम पड़ाव पर विश्व कप के लिए भारतीय टीम की घोषणा की गई थी। उस समय तक आईपीएल में दो भारतीय बल्लेबाजों ऋतुराज गायकवाड़ और वैंकटेश अय्यर ने अपनी बल्लेबाजी से तहलका मचा रखा था और दो भारतीय बालरों हर्षल पटेल और ओवेश खान ने अपनी गेंदबाजी से लोगों को प्रभावित कर रखा था सभी जानते थे कि हार्दिक पांड्या चोटिल हैं उसके बाद भी न केवल उन्हें टीम में चुना गया बल्कि पहले मैच में बालिंग न करने के बाद भी दूसरे मैच में भी खिलाया गया। लेकिन इनफार्म खिलाड़ी ऋतुराज गायकवाड़, वैंकटेश अय्यर, हर्षल पटेल और ओवेश खान को टीम में स्थान भी नहीं मिला अनुभवी आर. अश्विन को भुवनेश्वर कुमार के स्थान पर और हार्दिक पांड्या के स्थान पर शार्दूल ठाकुर को खिलाना था उससे बालिंग का विकल्प बढता। अश्विन को को या तो टीम में नहीं चुनना था और चुना गया तो खिलाना था क्योंकि धीमी पिच पर वरूण चक्रवर्ती के न चलने पर अच्छे विकल्प साबित होते।भारत में नामी खिलाड़ियों को टीम में जोड़ा जाता है भले ही वह फार्म में न हो। इस बार भी ऐसा ही है जिसे भारतीय टीम भुगत रही है। सबसे बड़ी पनौती टीम की कप्तानी विराट कोहली के हाथ में है। विराट कोहली अच्छे खिलाड़ी हो सकते हैं लेकिन उतने ही घटिया कप्तान हैं सारे खिलाड़ी उनसे डरे रहते हैं कब क्या बोल दें, यह बात पक्की है कि टीम में कुछ बड़े खिलाड़ियों में आपस में मनमुटाव है। एक फैक्टर रवी शास्त्री भी हैं कोहली और शास्त्री ने अपना गुट बना रखा था जिसकी जानकारी बीसीसीआई के अधिकारियों को थी सम्भवतः अब भारतीय टीम में इस गुटबाजी के अंत का समय आचुका है जिसकी शुरुआत इस विश्व कप की समाप्ति के बाद होना है। सम्पादकीय -News 51.in

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