Tuesday, May 21, 2024
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धोनी महान शख्सियत,दिल में दर्द, हंसता चेहरा,धोनी क्यों हुए धीमे

महेंद्र सिंह धोनी एक ऐसा इंसान जो झारखंड के रांची में बेहद साधारण परिवार में 7 जुलाई 1981में पैदा हुए। पहले फुटबॉल खेले बाद में क्रिकेट खेलना शुरू किया। लोकल मैचों में लम्बे -लम्बे छक्के, चौके मारते थे। रांची में बेहद लोकप्रिय हुए, उनके खेल को देखने रांची के लोगों में भारी भीड़ जमा हो जाती थी। बाद भारतीय टीम में आए और यहाँ भी अपनी छाप छोड़ी। लम्बे बालों में आकर्षक और स्मार्ट लगते थे बाद में सचिन तेंदुलकर ने उनके अंदर के गुणों को पहचाना और उनके ही कहने पर उन्हें जल्द ही भारतीय टीम का कप्तान बना दिया गया। 2007 में टी-टवंटी विश्व कप, 2008 सीबी सिरीज, 2009-टेस्ट चैम्पियन शिप, 2010-एशियाकप ,आईपीएल ट्राफी, चैम्पियंस लीग टी-टवंटी, 2011-विश्वकप चैम्पियन, आईपीएल ट्राफी, 2013 चैम्पियंस ट्राफी, 2014- चैम्पियंस लीग टी टी-टवंटी, 2016 एशिया कप, 2018 -आईपीएल ट्रॉफी। ये तो उनकी उपलब्धियां हैं। उन्हें उनके खेल के लिए पद्मश्री, पद्मभूषण, राजीव गांधी खेल रत्न से सम्मानित किया जा चुका है।

इनके बुरे दौर की शुरुआत हुई रवि शास्त्री के टीम मैनेजर बनने के बाद से और विराट कोहली के अंदर छिपी कप्तान बनने की लालसा के बाद, रवि शास्त्री ने विराट कोहली का खुल कर समर्थन करना शुरू किया तो विराट ने भी अपनी चाहत का इजहार खुलेआम करना शुरू कर दिया। धोनी के गाडफादर श्री निवासन के बुरे दिन आने से धोनी के लिए हालात उनके विपरीत होते गए। ऐम एस के प्रसाद और रवी शास्त्री और कोहली ने षडयंत्र कर धोनी को पहले टेस्ट टीम की कप्तानी बाद में टी -20 से विदाई के लिए मजबूर किया गया। उस समय तक विराट कोहली बड़े और स्टार खिलाड़ी बन चुके थे। अब धोनी को टीम से भी बाहर करने का प्रयास शुरू हो चुका था। बीच में अनिल कुम्बले टीम मैनेजर बनाए गए लेकिन विराट कोहली की अगुवाई में खिलाड़ियों ने कुम्बले के खिलाफ बगावत कर दिया। खिलाड़ियों तक में विराट कोहली और रवी शास्त्री का खौफ बढ गया था। दिखावे के लिए फिर से क ई खिलाड़ियों का इंटरव्यू लिया गया लेकिन रवी शास्त्री को विराट कोहली के दबाव में फिर से मैनेजर बना दिया गया। धोनी के खेल पर इन सब घटनाक्रम का बुरा असर पड़ा। उन्हें यह डर हो गया कि जरा भी खराब खेलने से टीम से भी हटाये जा सकते हैं वह एक -एक रन के लिए जूझने लगे मैदान में नौसिखिया बल्लेबाजों की तरह आउट होने लगे और लोगों में उन्हें टीम से हटाने की मांग भी शुरू हो गई। वह तो भला हो सचिन तेंदुलकर, सौरभ गांगुली और लक्ष्मण की कमेटी बनने के बाद इन लोगों ने धोनी को प्रोटेक्ट किया और फिर धोनी भी रन बनाने लगे और 2019 का विश्व कप खेल सके। आजतक धोनी ने अपने मुख से या चेहरे के हावभाव से अपने उपर हो रहे अन्याय को जाहिर नहीं होने दिया। विराट कोहली लाख मीडिया में धोनी की तारीफ़ करते रहें लेकिन जो उपर लिखा गया है वही सच्चाई है उन्हें कभी केदार जाधव कभी दिनेश कार्तिक, कभी हार्दिक पांड्या जैसों से भी नीचे खिलाया गया लेकिन वह सदैव चेहरे पर मुस्कराहट लिए रहे। लोग कहते हैं धोनी पहले की तुलना में काफी धीमी बैटिंग करते हैं किंतु किसी ने कारण जानने का प्रयास नहीं किया। लोग आज भी सचिन तेंदुलकर को महान खिलाड़ी महान इंसान और हर दिल अजीज हैं वे सारे गुण धोनी में भी है। पहली बार धोनी के आंसू से लोगों को उनके दर्द का एहसास लोगों को हुआ शायद उन्हें यह भरोसा था कि वह मैच जीता लेंगे, लेकिन यह हो न सका। सचिन तेंदुलकर के बाद उतना ही दर्द लोगों धोनी के मैदान से बाहर रिटायर होने पर होगा। आउट होकर मैदान से जाते देख दर्शकों की भी आंखे भर आई थी।

सम्पादक की कलम से ——-

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