Monday, April 22, 2024
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क्रिकेट -ये सिद्ध हुआकि मैच बल्लेबाज नहीं गेंदबाज जिताते है

आप को वेस्टइंडीज़ टीम कागुजरा दौर याद होगा जब वेस्टइंडीज टीम का दबदबा पुरे विश्व में छाया हुआ था। दूसरी टीम का जब भी मैच होना होता तो उनके खिलाडी वेस्टइंडीज़ केबॉलरों के सामने क्रीज पर खड़े होने में डरते थे। कई खिलाड़ियों के पैर कापने लगते थे। हलाकि वेस्टइंडीज़ के कुछ बल्लेबाज भी अच्छे थे लेकिन उनकी मुख्या ताकत उनके तेज गेंदबाज ही थे बारह बरस तक वेस्टइंडीज का पुरे विस्व पर तेज गेंदबाजों के बल पर दबदबा बना रहा। माइकअल होल्डिंग एंडी राबर्ट्स,मार्सल गार्नर कई वर्षो विस्व पटल पर छाए रहे १९८३ में एक दिवसीय विश्व कप के फ़ाइनल में भारत के हाथों हारने के बादवेस्टइंडीज के इन तेजगेंद्बाजो कीउम्र बढ़ने के साथ ये रिटायर होते गए इस कड़ी के आखिरी गेंदबाज कोर्टनिवाल्श एम्ब्ब्रोस थे इसके बाद आस्ट्रेलिया ने भी यही नुस्खा को यानि तेजगेंद्बाजी को अपना हथियार बनाया। उनकी टीम में लिली और टामसन जैसे तेजगेंद्बाजो की बदौलत आस्ट्रेलिया वर्षो तक विश्व क्रिकेट पर छाया रहा। फिर ह्यूज ,मैक्ग्राथ आदि गेंदबाज आए। अब बल्लेबाजों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए थायीगार्ड और हैलमेट पहनने की इजाजत बल्लेबाजों को दी गई। फिर एकदिवसीय और टेस्टमैचोमें एक बाउंसर या दो बाउंसर तक की पाबन्दी से विश्व क्रिकेट मेंपहले जैसा रुतबा तेज गेंदबाजों का नहीं रहा। लेकिन कम स्कोर करने के बाद भी ये टीमें वर्षो तक मैच जीतती रही। तेज गेंदबाजों का जलवा काम होने के बाद स्पिनरों की महत्ता बढ़ने ागी। आस्ट्रेलिया शेनवार्न की बदौलत नंबर एक बना रहा। उसके रिटायर होते ही आस्ट्रेलिया आज कहा है सभी को पता है पाकिस्तान में इमरान खान वसीम अकरम वकार जैसे तेज गेंदबाज रहे है मुस्ताक अहमद तौसीफ अहमद जैसे गेंदबाजों ने पाकिस्तान को अपार सफलताएं दिलाई है।अब भारतीय टीम की विजयगाथा पर नजर डाले तो विश्व कप १९८३ के फ़ाइनल में १८३ रन बनाने के बाद भी गेंदबाजों के बल परभारत मैच जीत गया था। बेदी,प्रसन्ना वेंकटराघवन फिर कपिलदेव ने न जाने कितने मैच जिताये है कपिलदेव के योगदान को भला कौन भूल सकता है हाल के कुछ वर्षो में भारत की सफलता में अनिलकुबले ,कुलदीपयादव यजुवेंद्राचाहल उमेशयादव ,बुमराह ,भुवनेश्वर कुमार आर अश्विन ,रविंदर जडेजा आदि। इन सभीबालरो ने हर देश में जाकर भारतकी विजय गाथा दिलाई है इंग्लॅण्ड के जिस दौरा को कड़ी परीक्षा बताई जा रही थी। टी ट्वेंटी की सीरीज भी भारत गेंदबाजों की बदौलत २-१ से जीत चूका है पहला एक दिवसीय गेंदबाजों की बदौलत भारत जीता दूसरे में गेंदबाज नहीं चले तो भारत हर गया इससे ये साबित हैकि ९०%मैच गेंदबाज जीतते है १०% बल्लेबाज। बल्लेबाज या तो मैच ड्रा कराता है या कभी कभी जीत भी दिलाता है लेकिन श्रेय हमेशा बल्लेबाजों को ही मिलता है।

लेखक -रवि प्रताप सिंह ,न्यूज़ एडिटर

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