Sunday, May 26, 2024
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क्या बिहार कांग्रेस अध्यक्ष पद पर कन्हैया कुमार की होने वाली है ताजपोशी, मदन मोहन झा का लिया गया इस्तीफा

बिहार में लालू प्रसाद यादव के उदय के बाद से कांग्रेस राजद की पिछलग्गू पार्टी बन कर रह गयी है और गाहे-बगाहे लालू प्रसाद यादव कांग्रेस का उपहास भी उड़ाया करते थे कभी कंधा देने के लिए चार लोग भी नहीं बचेंगे या वोटकटवा पार्टी कहते थे फिर भी खून का घूँट पीकर कांग्रेस लालू प्रसाद यादव की पार्टी से गठबंधन कर चुनाव लड़ती थी। किंतु राजनीति के धुरंधर लालू यादव दिल्ली में कांग्रेस की अहमियत भी समझती थी। किंतु इस बार बड़ी मुश्किल से तेजस्वी यादव ने लालू यादव के कहने पर विधान सभा चुनाव में कांग्रेस को उसकी हैसियत से ज्यादा सीट दी थी लेकिन कांग्रेस राजद गठबंधन की सबसे कमजोर कड़ी साबित हुई थी और बिहार में राजद गठबंधन की सरकार न बन पाने की बड़ी वजह कांग्रेस पार्टी ही बनी थी उसके बाद से तेजस्वी यादव का कांग्रेस से मोह भंग हो गया था और विधान परिषद् चुनाव में कांग्रेस को एक भी सीट राजद ने कांग्रेस के मांगने के बाद भी नहीं दी थी लेकिन एक सीट कांग्रेस ने जीत कर न केवल अपनी प्रतिष्ठा को बचाया बल्कि कांग्रेस को पुनः बिहार में राजद से अलग होकर अकेले लड़ने का हौंसला भी दिया है और अब कांग्रेस को बिहार में मजबूत करने के उद्देश्य से चार साल से अध्यक्ष रहे मदन मोहन झा से इस्तीफा ले लिया गया है। वाम मोर्चा से आये जेएनयू के छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष और बहुचर्चित और युवाओं में बेहद लोकप्रिय और अपनी भाषण शैली में लोगों का दिल जीतने वाले कन्हैया कुमार ने जबसे कांग्रेस ज्वाईन किया था तभी से उन्हें बिहार कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने के कयास लगाए जा रहे हैं। उन्हें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का वरदहस्त भी हासिल है और राहुल गांधी के पहल पर ही वह कांग्रेस में शामिल हुए थे। कांग्रेस पार्टी को बिहार में एक ऐसे फायर ब्रांड युवा नेता की तलाश है जो भाजपा और नीतिश कुमार के अलावा राजद के तेजस्वी यादव को भी टक्कर दे सके और इन सभी कसौटीयों पर कन्हैया कुमार फिट बैठते हैं सबसे बड़ी बात तो यह है कि तेजस्वी यादव कन्हैया कुमार को फूटी आंख नहीं सुहाते और कांग्रेस में कन्हैया कुमार के आने के कारण ही कांग्रेस और राजद का गठबंधन टूटा है। तेजस्वी यादव को कन्हैया कुमार की लोकप्रियता से बिहार में बड़ा खतरा है। कन्हैया कुमार बिहार के सवर्णो की भूमिहार जाति से आते हैं। वैसे तो कांग्रेस के सदाक़त आश्रम, दलित नेता बाबू जगजीवन राम की बेटी मीरा कुमार, दलित नेता अशोक राम और राजेश कुमार तथा मुस्लिम नेता शकील अहमद खान और तारिक अनवर के नाम की भी चर्चा है। लेकिन सच्चाई यही है कि वर्तमानकाल में परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए गलत नहीं होगा कि कन्हैया कुमार बिहार कांग्रेस अध्यक्ष के लिए सबसे आदर्श चेहरा होगा। सम्पादकीय -News 51.in

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