Sunday, April 14, 2024
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क्या उत्तर प्रदेश के चुनाव में ममता बनर्जी के आने से सपा को कोई चुनावी लाभ मिलने वाला है?

कल पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लखन ऊ पहुँच कर सपा के पक्ष में वोट डालने की अपील की या समझिये अखिलेश यादव के पक्ष में प्रचार किया। हालांकि यह प्रचार कम ,लोकसभा चुनाव में एक कांग्रेस विहीन तीसरे मोर्चे को बनाने की कोशिश के रूप में कहना और कांग्रेस को चिढाने की कोशिश ज्यादा कही जा सकती है। क्योंकि पहली बात तो यह है कि ममता बनर्जी का यूपी में न तो कोई जनाधार है और न ही उनके कहने से वोटर वोट करने वाला है। यह मात्र नैतिक समर्थन माना जा सकता है। और यह बात सभी मतदाता भी भली भाँति यह समझ रहा है। किंतु क्या कांग्रेस को अलग कर के भाजपा के विरूद्ध कोई मजबूत गठबंधन खड़ा होना सम्भव है और ऐसी दशा में, जबकि अब कांग्रेस भी पहले की अपेक्षा काफी सक्रिय और मजबूती की तरफ बढ रही है।न तो अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के बाहर राजनीतिक रूप से मज़बूत हैं और न ही ममता बनर्जी का पश्चिम बंगाल के बाहर कोई वजूद है उसके उपरांत भी अगर अन्य राज्यों में ये अपने उम्मीदवारों को उतारते हैं तो यह मात्र कांग्रेस को कमज़ोर करने और भाजपा को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से ही हो सकता है ।यही हाल भाजपा का भी है भाजपा सपा, बसपा, आम आदमी पार्टी, अकाली दल तृणमूल कांग्रेस आदि विपक्षी दलों को जीतते हुए देख सकती है लेकिन कांग्रेस को नहीं। सामने उदाहरण पंजाब चुनाव का है जहाँ भाजपा अमरिंदर सिंह की पार्टी मिलकर चुनाव लड़ कर भी जान रही है कि एक दो सीट मिलना भी मुश्किल है वहाँ लड़ाई कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की है तो दो साध्वियों के यौन शोषण में 10-10 वर्ष (कुल 20 वर्ष की सजा भुगत रहे सिरसा के सच्चा सौदा प्रमुख गुरूमीत सिंह को 21 दिन की फरलो (चुनाव प्रचार के दिनों के दौरान) मिल गई और उन्होंने आम आदमी पार्टी के पक्ष में वोट डालने की अपील की है इसका सीधा अर्थ ये है कि कांग्रेस पंजाब में किसी कीमत पर सरकार न बना पाये भले ही हम न बने और आम आदमी पार्टी भले ही सरकार बना ले। इसका सीधा अर्थ भाजपा का मुख्य प्रतिद्वंदी कमजोर से कमजोर हो जाए और अन्य विपक्षी दलों का गठबंधन इस लिए है कि कांग्रेस कमजोर हो ताकि हम मुख्य विपक्षी दल बने। यानि सबकी आंखों का कांटा कांग्रेस पार्टी ही है।

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