Sunday, May 26, 2024
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एशियाई खेल -जकार्ता गुड बाय,2022 मे ग्वांगझू मे होगी मुलाकात

जकार्ता – एशियाई खेलो का समापन हो चुका है ।भारत ने 69 पदक हासिल कर एक रिकॉर्ड बनाया है।भारत ने 15 स्वर्ण पदक हासिल कर 1951के एशियाई खेल के 15 स्वर्ण पदक की बराबरी कर ली ।
उक्त सभी बाते भारतीय मीडिया,नेता लोग कर रहे है । लगभग 58 वर्ष के बाद हम 15 स्वर्ण पदक प्राप्त कर अपनी पीठ ठोक रहे है।लेकिन भारतीय जनमानस सब समझ रहा है हमारे देश की आबादी लगभग 135 करोड़ है और 45 देशो ने इस एशियाड मे हिस्सा लिया था हमने आठवा स्थान हासिल किया।सुनने मे अच्छा लग रहा है कि 45 देश मे आठवा स्थान ।लेकिन जब हम यह देखेंगे कि हमसे उपर सात देश कौन कौन है तो सर पीटने का मन करता है ।सबसे उपर चीन ने 132 स्वर्ण पदक के साथ कुल 289 पदक, दूसरे नंबर पर जापान ने 75 स्वर्ण पदक के साथ कुल 205 पदक हासिल किए ।लेकिन उसके बाद के देश उजबेकिस्तान, इंडोनेशिया, चीनी ताइपे जैसे देश हमसे उपर है ।कम से कम चीन और जापान के बाद तीसरे स्थान पर भी भारत रहता तो भी हमारा सीना गर्व से उचा होना था । इसमे खिलाडियो का कोई दोष नही दिया जा सकता । आप दूसरे देश के एथलेटिक्स खिलाडियो और हाकी, बैडमिंटन, फुटबॉल और अन्य खेलो के खिलाडियो की तुलना करे तो आप देखेंगे कि भारत मे क्रिकेट खिलाडियो को जहा हीरो समझा जाता है ।धन की वर्षा उनके उपर होती है जनता, उद्योग पति ,मीडिया सभी का ध्यान सिर्फ क्रिकेट खिलाडियो पर ही रहता है ।लेकिन अन्य देशो मे दूसरे खेलो के खिलाडी वहा की जनता के हीरो होते है । उनके उपर उद्योग पति, मीडिया और जनता सभी उनके लिए न्योछावर रहते है ।आप देखेंगे कि इस एशियाई खेलो मे भारत के जिन खिलाडियो को पदक हासिल हुए है उनमे अधिकतर गांव से आये खिलाड़ी है ।खिलाडियो के साथ जो अधिकारी, कोच या मैनेजर जाते है उनका व्यवहार गांव के खिलाडी जो अग्रेजी भाषा में कमजोर होते है उनमे शहर के खिलाडी जो अग्रेजी फर्राटे से बोलते है उनमे अलग अलग नजरिया से देखते है । उसके बाद भी जब ये खिलाड़ी जी जान लगा कर देश को पदक दिलाते है तो लोग एक बार ट्विटर पर ट्वीट कर उन्हे भूल जाते है ।हालांकि अब पहले की तुलना मे स्थिति मे कुछ सुधार हुआ है लेकिन जब तक हमारी मनःस्थिति इन खेलो और उनके खिलाडियो के प्रति नही बदलेगी और जब तक हम क्रिकेट की भांति अन्य खेलो और उनके खिलाडियो को प्यार, सम्मान
और पैसा नही देगे हमारी सरकार और उद्योग पतियो को भी शामिल करते हुए कहना है, तब तक हमारी स्थिति मे ज्यादा सुधार सम्भव नही है ।

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