Monday, March 4, 2024
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आधुनिक परिवेश में स्त्रियों को बच्चे को जन्म देने या गर्भपात का हक -सुप्रीम कोर्ट का सर्वश्रेष्ठ निर्णय

नयी दिल्ली (30 सितम्बर) – सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों को जन्म देने और गर्भपात को लेकर एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है जिसमें भारत की सभी महिलाओं को गर्भपात कराने का कानूनी अधिकार दिया गया है ।मेडिकल टर्मिनेशन आफ प्रिगनेन्सी ऐक्ट की व्याख्या करते हुए सभी महिलाओं को (विवाहित या अविवाहित) कानूनी तरीके से 20से24 सप्ताह के बीच गर्भपात कराने का अधिकार है। हालांकि दुष्कर्म की परिभाषा में वैवाहिक दुष्कर्म शामिल रहेगा। जस्टिस डी. वाई. चंद्र चूड़ ,ए. एस. बोपन्ना तथा जे. बी. पार्डिवाला की पीठ ने एक अविवाहित महिला की याचिका पर सुनाया है। इस ऐतिहसिक फैसले को वर्तमान परिवेश में अत्यंत ही मानवीय और महिलाओं को राहत प्रदान करने वाला है। विवाहित और अविवाहित के बीच यह कृतिम भेद कानून की कसौटी पर सही नहीं कि सिर्फ विवाहित महिलाऐं ही यौन गतिविधियों में लिप्त रहती हैं यह रूढिवादी सोच है इस आदेश का वर्तमान परिप्रेक्ष्य में समाज पर व्यापक असर होगा। इसमें कोई शक नही। हालांकि आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इसमें महिला की सहमति ही पर्याप्त है यदि महिला नाबालिग या मानसिक रूप से अस्वस्थ है तो उसके संरक्षक की सहमति आवश्यक है और चिकित्सकों को भी सिर्फ यह देखना है कि एम. टी. पी. का पालन है या नहीं।

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