Saturday, April 20, 2024
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अपना शहर मंगरूआ ——– दूबे उवाच

अपना शहर —

मगरुवा —————————— दूबे उवाच

कल मण्डी से वापस लौट रहा था करीब पांच बजे के लगभग पुरानी कचहरी में साधू चाय वाले की दुकान के सामने ज्ञान प्रकाश दुबे , जुल्फेकार बेग , रामचन्द्र यादव , कैलाश पाण्डेय के साथ मगरुवा भी बहस में उलझा था दुबे जी से बोल रहा था की दुबे जी हरी मटर सब पाकिस्तान भेजा रहा है इतने में दुबे जी बोले यार मोदी ओकरे जबड़ा से खीच ले अइहे घबरा मत —
मगरुवा बात आगे बढ़ता मैंने उसे बीच में रोक दिया खुद ज्ञान प्रकाश दुबे जी पूछ लिया आप राजनीती में कब आये ?
लगे बताने 1971 बैचलर डिग्री लिया फिर शिब्ली चला गया | जी पी दूबे ने बोला की दादा 1972 में शोसलिस्ट पार्टी में शामिल हुआ उस समय मधु लिमये और जार्ज राष्ट्रीय नेता थे | बाऊ विश्राम राय प्रदेश में जिले में रामप्यारे उपाध्याय , विष्णुदेव गुप्ता ,मार्कण्डेय सिंह , जितेन्द्र मिश्रा , वैजनाथ सिंह जैसे लोग थे | 73 – 74 में पार्टी टूटी बाऊ साहब राजनारायन जी के साथ हो लिए और हम सब मधु लिमये व जार्ज के साथ 77 में जनता पार्टी में शामिल उसके बाद जब पार्टी टूटी 80 में लोकदल बना 81 में चौधरी साहब ने दलित मजदुर किसान पार्टी बनाई उसमे हेमवती नन्दन बहुगुणा जी मुख्य महा सचिव बने पार्टी फिर टूटी फिर लोकदल ( अ ) और लोकदल ( ब ) उसके बाद 91 में मंडल कमिशन को लेकर विश्वनाथ प्रताप सिंह ने जनता दल बनाया पार्टी फिर टूटी 93 – 94 में जार्ज ने समता पार्टी बनाया उसके बाद फिर पार्टी टूटी जनता दल यू बना शरद यादव के साथ हूँ | मैंने जी पी दुबे से पूछा बाऊ विश्राम की कुछ बाते बताये उन्होंने हल्की सी मुस्कराहट लेते हुए छात्र नेता वीरेन्द्र सिंह एक बार बाऊ साहब के लिए हरी सब्जी ले गये वह पहले से मैं मौजूद था उन्होंने कहा जरा देखबा हो पइसा देहले ह की न सब्जी वाले के पता करा जरा –
दूसरी घटना बताया सन 77 में पार्लियामेंट का टिकट बट रहा था उस समय बाऊ साहब लखनऊ में थे शिवराम जी घोसी के लिए पार्लियामेंट के लिए टिकट मांग रहे थे रायल होटल में शिवराम जी ने कहा जरा बात कयेलेता उपर बू साहब उठे तब एक ही फोन हुआ करता था बाऊ साहब नीचे ए उन्होंने राजनारायण जी बात किया टिकट उनका पक्का हो गया उसी समय शिवराम जी ने मुझसे कहा जा जरा देखा त का बात करेने जबकि उस समय शिवराम जी को सी बी गुप्ता भी चाहते थे | एक बार की बात है बाऊ विसह्राम राय बीमार थे शिब्ली एकेडमी के सामने ही रहते थे अक्सर मैं चला जाता था उस समय मुलायम सिंह साम्प्रदायिकता विरोधी रैली चला रहे थे बाहर बाऊ साहब कम्बल बिछाकर लेते थे उन्होंने कहा मुलायम सिंह साम्प्रदायिकता विरोधी रैली चला रहे है इसे जनता में ठीक संदेश नही जा रहा है , साम्प्रदायिकता से लड़ो ठीक है राम से नही लड़ना चाहिए | राम से लड़ते रहोगे तो जनमानस खिलाफ ओ जाएगी भारत बड़ा धार्मिक देश है राम से नही लड़ना चाहिए साम्प्रदायिकता से लड़ो बाऊ साहब की बात सही निकली आज बी जे पी सत्ता में है | बाऊ विश्राम राय ने ही अपना टिकट चन्द्रशेखर जी को दिया ऐसे थे बाऊ विश्राम राय जी —- लेखक- सुनील कुमार दत्ता स्वतंत्र पत्रकार एवं दस्तावेजी प्रेस छायाकार

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